नेपाल में ग्लेशियर टूटा।भयानक बाढ़ से तबाही। उत्तराखंड में शारदा नदी पर हाई अलर्ट

नेपाल-तिब्बत सीमा के हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर और चट्टानों के बड़े हिस्से के टूटने के बाद आई भीषण फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई है। पानी, बर्फ, चट्टान और मलबे के तेज बहाव ने कई इलाकों में सड़क, पुल और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया। इस आपदा का असर अब भारत के सीमावर्ती इलाकों में भी महसूस किया जा रहा है। उत्तराखंड के चंपावत जिले में शारदा नदी के जलस्तर को लेकर प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है।
Langtang Lirung से शुरू हुई तबाही की कड़ी
रिपोर्टों के मुताबिक नेपाल के Langtang Lirung क्षेत्र में पहाड़ से बड़ी मात्रा में चट्टान और मलबा ग्लेशियर पर गिरा। इसके बाद बर्फ और चट्टानों का विशाल हिस्सा नीचे की ओर खिसक गया और नदी में जा गिरा। इससे नदी में अचानक मलबे और पानी का तेज बहाव पैदा हुआ, जिसने आगे चलकर फ्लैश फ्लड का रूप ले लिया।
शुरुआत में इस घटना को भूकंप से जोड़कर देखा गया था, क्योंकि उसी सुबह चीन सीमा के पास 4.4 तीव्रता की भूकंपीय गतिविधि दर्ज हुई थी। हालांकि, अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के मुताबिक दर्ज हुई seismic energy संभवतः ग्लेशियर और चट्टानों के ढहने से पैदा हुई थी। घटना की सटीक वजह को लेकर वैज्ञानिक विश्लेषण अभी जारी है।
नेपाल और तिब्बत में भारी नुकसान
फ्लैश फ्लड के तेज बहाव ने नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में कई बस्तियों और महत्वपूर्ण ढांचों को प्रभावित किया। नदियों में अचानक आए मलबे के कारण पुल और सड़कें क्षतिग्रस्त हुईं, जबकि कई इलाकों में राहत और बचाव अभियान मुश्किल हो गया है।
रॉयटर्स के मुताबिक इस आपदा में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है और हजारों लोग लापता बताए जा रहे हैं। प्रभावित लोगों में विदेशी नागरिक और तीर्थयात्री भी शामिल हैं।
भारत में भी बढ़ी चिंता, चंपावत हाई अलर्ट
नेपाल में आई इस भीषण बाढ़ के बाद उत्तराखंड के सीमावर्ती जिले चंपावत में प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। टनकपुर स्थित SDRF पोस्ट को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
SDRF की टीम शारदा घाट, शारदा बैराज और आसपास के निचले इलाकों में लगातार निगरानी और पेट्रोलिंग कर रही है। टीम नदी के जलस्तर और संभावित खतरे पर नजर बनाए हुए है तथा स्थानीय प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में है।
लोगों को शारदा नदी से दूर रहने की सलाह
प्रशासन और SDRF ने स्थानीय लोगों, यात्रियों और मछुआरों को शारदा नदी के किनारे जाने से बचने की सलाह दी है। खासतौर पर निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को नदी के जलस्तर में अचानक बदलाव की स्थिति में सतर्क रहने को कहा गया है।
SDRF की टीम को किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत और बचाव अभियान शुरू करने के लिए जरूरी उपकरणों के साथ तैयार रखा गया है।
क्यों महत्वपूर्ण है शारदा बैराज?
चंपावत का शारदा बैराज भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में महत्वपूर्ण जल संरचना है। शारदा नदी नेपाल में महाकाली नदी के नाम से भी जानी जाती है। ऐसे में नेपाल में भारी बाढ़ आने के बाद नदी के बहाव और जलस्तर पर भारत की तरफ भी नजर रखना जरूरी हो जाता है।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता नदी किनारे रहने वाले लोगों की सुरक्षा और किसी भी संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने की तैयारी है।
हिमालयी आपदाओं का बढ़ता खतरा
वैज्ञानिकों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ता तापमान ग्लेशियरों और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फ तथा चट्टानों की स्थिरता को प्रभावित कर रहा है। इससे ग्लेशियर टूटने, भूस्खलन और अचानक बाढ़ जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।
हालांकि किसी एक घटना को सीधे तौर पर केवल जलवायु परिवर्तन का परिणाम बताना जल्दबाजी होगी। वैज्ञानिक इस आपदा में ग्लेशियर की स्थिति, भूगर्भीय गतिविधि और स्थानीय परिस्थितियों समेत कई कारकों का अध्ययन कर रहे हैं।
अभी क्या है स्थिति?
नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है, जबकि भारत की ओर उत्तराखंड में प्रशासन ने एहतियाती निगरानी बढ़ा दी है। चंपावत में SDRF की टीमें संवेदनशील इलाकों में लगातार गश्त कर रही हैं और शारदा नदी के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है।
नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर और चट्टानों के टूटने से शुरू हुई आपदा ने कुछ ही समय में बड़े क्षेत्र को प्रभावित कर दिया। नेपाल और तिब्बत में भारी तबाही के बाद अब भारत में भी सीमावर्ती इलाकों को लेकर सतर्कता बढ़ गई है। चंपावत में शारदा नदी पर हाई अलर्ट इस बात का संकेत है कि हिमालयी आपदाओं का असर सीमाओं से कहीं आगे तक पहुंच सकता है।
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