TMC के 20 बागी सांसदों को लोकसभा सचिवालय का नोटिस, अभिषेक बनर्जी की याचिका पर 7 दिन में देना होगा जवाब

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों के खिलाफ चल रही अयोग्यता की कार्रवाई में अब बड़ा कदम उठाया गया है। लोकसभा सचिवालय ने इन सभी 20 सांसदों को नोटिस जारी कर 7 दिन के भीतर जवाब मांगा है। यह कार्रवाई TMC के राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी की ओर से दायर अयोग्यता याचिकाओं के बाद हुई है।
मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एक दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी की याचिका पर सुनवाई करते हुए 20 सांसदों को नोटिस जारी किया था। बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से इन सांसदों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने की मांग की थी।
20 सांसदों को क्यों मिला नोटिस?
दरअसल, TMC के इन 20 सांसदों पर आरोप है कि उन्होंने पार्टी छोड़कर Nationalist Citizens Party of India (NCPI) के साथ जाने का फैसला किया है। TMC का कहना है कि ये सांसद पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे और बाद में पार्टी से अलग हो गए, इसलिए उन पर संविधान की दसवीं अनुसूची यानी Anti-Defection Law के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।
अभिषेक बनर्जी ने इन सांसदों के खिलाफ अलग-अलग अयोग्यता याचिकाएं दाखिल की थीं। ये याचिकाएं 18 जून 2026 की हैं। अब लोकसभा सचिवालय ने इन्हीं याचिकाओं की कॉपी 20 सांसदों को भेजी है।
7 दिन में देना होगा जवाब
लोकसभा सचिवालय की ओर से जारी नोटिस में सांसदों से कहा गया है कि वे नोटिस मिलने के 7 दिनों के भीतर अपनी टिप्पणी और जवाब दें।
नोटिस Rule 6 of the Members of Lok Sabha (Disqualification on Ground of Defection) Rules, 1985 के तहत जारी किए गए हैं। सांसदों के जवाब के बाद मामले को लोकसभा अध्यक्ष के सामने आगे की प्रक्रिया के लिए रखा जाएगा।
इसका मतलब यह नहीं है कि 20 सांसदों की सदस्यता अभी खत्म हो गई है। फिलहाल सिर्फ अयोग्यता की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। अंतिम फैसला लोकसभा अध्यक्ष को करना होगा।
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था मामला
अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया था कि 20 सांसदों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाएं दाखिल होने के बावजूद लोकसभा अध्यक्ष की ओर से लंबे समय तक कोई औपचारिक कार्रवाई नहीं हुई।
बनर्जी ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और मांग की कि लोकसभा अध्यक्ष को इन याचिकाओं पर उचित समय सीमा में फैसला लेने का निर्देश दिया जाए।
25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई की और 20 सांसदों को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 28 अगस्त को तय की है।
बागी सांसदों का क्या कहना है?
दूसरी तरफ, इन सांसदों की ओर से यह दावा किया गया है कि उनका NCPI के साथ जाना वैध विलय है। संसद में उन्हें NCPI समूह के तौर पर भी माना गया है और उन्होंने NDA की संसदीय गतिविधियों में हिस्सा लिया है। हालांकि, अयोग्यता के सवाल पर अंतिम फैसला अभी बाकी है।
यही वजह है कि आने वाले दिनों में लोकसभा अध्यक्ष के सामने दोनों पक्षों की दलीलें महत्वपूर्ण होंगी।
अब आगे क्या होगा?
अब 20 सांसदों को नोटिस का जवाब देना है। इसके बाद उनके जवाब और TMC की अयोग्यता याचिकाओं पर विचार किया जाएगा। फिर लोकसभा अध्यक्ष इस मामले में आगे की प्रक्रिया तय करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी और 28 अगस्त की अगली सुनवाई के कारण यह मामला फिलहाल राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर काफी अहम हो गया है।
मामला सिर्फ TMC की अंदरूनी लड़ाई नहीं
यह विवाद सिर्फ TMC और उसके बागी सांसदों के बीच राजनीतिक टकराव नहीं है। इसके केंद्र में दलबदल विरोधी कानून और सांसदों की सदस्यता का संवैधानिक सवाल भी है।
अगर लोकसभा अध्यक्ष इन सांसदों को अयोग्य ठहराते हैं, तो इसका सीधा असर संसद में उनकी स्थिति पर पड़ेगा। वहीं, अगर उनके NCPI में जाने को वैध विलय माना जाता है, तो उनका पक्ष मजबूत हो सकता है।
इसलिए अब सबकी नजर 20 सांसदों के जवाब, लोकसभा अध्यक्ष की कार्रवाई और 28 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर है।
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