यूसुफ पठान समेत 3 मुस्लिम सांसदों ने NDA से बनाई दूरी, कहा- मुसलमानों के खिलाफ किसी कदम का समर्थन नहीं करेंगे

संसद परिसर में राजनीतिक हलचल के बीच पश्चिम बंगाल से जुड़े तीन सांसदों ने एक बार फिर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की संसदीय बैठक से दूरी बना ली। इनमें पूर्व क्रिकेटर और सांसद यूसुफ पठान, अबू ताहेर खान और खलीलुर रहमान शामिल हैं। तीनों सांसदों ने स्पष्ट किया कि वे NDA का हिस्सा नहीं हैं और भाजपा में शामिल होने का भी उनका कोई इरादा नहीं है।
लगातार दूसरी बार नहीं पहुंचे NDA की बैठक में
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में आयोजित NDA सांसदों की साप्ताहिक बैठक (मंगल मिलन) में तीनों सांसद लगातार दूसरी बार शामिल नहीं हुए। इससे पहले भी वे गठबंधन की बैठक से दूर रहे थे, जिसके बाद उनके राजनीतिक रुख को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं।
अबू ताहेर खान ने क्या कहा?
सांसद अबू ताहेर खान ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे और उनके दो साथी सांसद NDA के साथ नहीं हैं और न ही भाजपा में शामिल होने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे अपने संसदीय क्षेत्रों के विकास से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लेंगे, लेकिन ऐसा कोई कदम या विधेयक समर्थन नहीं करेंगे जो मुस्लिम समुदाय के हितों के खिलाफ हो।
मुस्लिम बहुल क्षेत्रों का करते हैं प्रतिनिधित्व
यूसुफ पठान, अबू ताहेर खान और खलीलुर रहमान पश्चिम बंगाल के मुस्लिम बहुल लोकसभा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, इन सांसदों के मतदाताओं के बीच भाजपा के साथ उनकी कथित निकटता को लेकर सवाल उठे थे। माना जा रहा है कि इसी कारण उन्होंने NDA की बैठकों से दूरी बनाए रखने का फैसला किया।
एनसीपीआई की मान्यता पर अभी फैसला बाकी
तीनों सांसद उस 20 सदस्यीय एनसीपीआई (NCPI) समूह का हिस्सा हैं, जिसे लोकसभा में अलग संसदीय दल के रूप में मान्यता मिलने का इंतजार है। यह मामला फिलहाल लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष लंबित है। मान्यता मिलने के बाद ही दल-बदल कानून के तहत इस समूह की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
राजनीतिक संकेत क्या हैं?
लगातार दूसरी बार NDA की बैठक से दूरी और सार्वजनिक रूप से दिए गए बयानों ने यह संकेत दिया है कि एनसीपीआई के भीतर सभी सांसद गठबंधन को लेकर एक जैसी सोच नहीं रखते। हालांकि पार्टी नेतृत्व ने किसी भी तरह के आंतरिक मतभेद से इनकार किया है, लेकिन तीन सांसदों का रुख आने वाले समय में पश्चिम बंगाल और राष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे सकता है।
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