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Saturday, October 31, 2026
सिंधु नदी के किनारे भारत-पाकिस्तान जल संधि से जुड़ा प्रतीकात्मक दृश्य
सिंधु जल संधि पर भारत का सख्त रुख, पाकिस्तान को दिया स्पष्ट संदेश
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सिंधु जल संधि पर भारत का सख्त रुख: “दोस्ती पाकिस्तान ने खुद खत्म की”, अमेरिकी राजदूत विनय क्वात्रा का बड़ा बयान

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भारत ने सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को स्थगित (अबेयंस) रखने के अपने फैसले पर एक बार फिर स्पष्ट रुख दोहराया है। अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने एक लेख में कहा कि यह निर्णय किसी एक घटना की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि पाकिस्तान के दशकों पुराने व्यवहार और सीमा पार आतंकवाद के लगातार समर्थन का परिणाम है। भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ विश्वसनीय और स्थायी कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि बहाल नहीं की जाएगी।

सिंधु जल संधि पर भारत का रुख क्यों सख्त हुआ?

विनय मोहन क्वात्रा ने अपने लेख में कहा कि 1960 में हुई सिंधु जल संधि दोनों देशों के बीच दोस्ती और सद्भावना की भावना के साथ की गई थी। लेकिन वर्षों तक आतंकवाद और शत्रुतापूर्ण गतिविधियों ने उस विश्वास को कमजोर कर दिया। उनके अनुसार, भारत द्वारा संधि को अबेयंस में रखने का फैसला इसी बदले हुए माहौल को दर्शाता है।

पहलगाम आतंकी हमले के बाद लिया गया फैसला

भारत ने 23 अप्रैल 2025 को सिंधु जल संधि को स्थगित रखने की घोषणा की थी। यह फैसला जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के अगले दिन लिया गया। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। भारत ने इस हमले के लिए पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद को जिम्मेदार ठहराया और स्पष्ट किया कि आतंकवाद जारी रहने तक संधि सामान्य रूप से लागू नहीं होगी।

सिंधु जल संधि में भारत और पाकिस्तान को क्या मिला?

1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई सिंधु जल संधि के तहत सिंधु बेसिन की छह नदियों का बंटवारा किया गया था। भारत को रावी, ब्यास और सतलुज जैसी पूर्वी नदियों का उपयोग करने का अधिकार मिला, जबकि पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चिनाब जैसी पश्चिमी नदियों का अधिकांश जल उपयोग करने का अधिकार दिया गया। दशकों तक भारत ने इस समझौते का पालन किया, लेकिन समय-समय पर जलविद्युत परियोजनाओं और तकनीकी मुद्दों को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद बने रहे।

अगस्त 2026 तक क्या है मौजूदा स्थिति?

भारत का रुख अगस्त 2026 तक भी अपरिवर्तित है। विदेश मंत्रालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को विश्वसनीय और स्थायी रूप से बंद नहीं करता, तब तक सिंधु जल संधि अबेयंस में ही रहेगी। हालांकि भारत ने पश्चिमी नदियों का जल प्रवाह पूरी तरह नहीं रोका है, लेकिन डेटा साझा करने, स्थायी सिंधु आयोग की बैठकों और संधि से जुड़े कई सहयोगात्मक दायित्वों को फिलहाल स्थगित रखा गया है।

भारत की आगे की रणनीति क्या है?

भारत का कहना है कि पड़ोसी देशों के साथ सहयोग और समझौते तभी प्रभावी हो सकते हैं, जब दोनों पक्ष आपसी विश्वास और शांति बनाए रखें। सरकार का रुख है कि आतंकवाद और सामान्य द्विपक्षीय सहयोग साथ-साथ नहीं चल सकते। ऐसे में सिंधु जल संधि की बहाली भी पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय कार्रवाई पर निर्भर करेगी।

भारत का मौजूदा रुख स्पष्ट है कि सिंधु जल संधि पर आगे का फैसला केवल जल प्रबंधन का विषय नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और सीमा पार आतंकवाद से जुड़े व्यापक मुद्दों से भी जुड़ा हुआ है।

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