
Ayodhya Ram Mandir Donation Case 2026: अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मामला इन दिनों चर्चा में है। मामले में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई है। हालांकि, जांच अभी जारी है और किसी भी आरोपी के खिलाफ आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं।

मामला कैसे शुरू हुआ?
जून 2026 के पहले सप्ताह में मंदिर के दान पात्र (हुंडी) से नकदी और आभूषणों के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आए। खुद को मंदिर का पूर्व लेखा प्रभारी बताने वाले महिपाल सिंह ने दावा किया कि चढ़ावे की राशि में गड़बड़ी हुई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत करने के बाद उन्हें पद से हटा दिया गया।
इसके बाद पूर्व कारसेवक संतोष दुबे ने राम जन्मभूमि थाने में शिकायत देकर ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोगों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच की मांग की।
SIT का गठन कब हुआ?
मामले को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून 2026 को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। जांच टीम ने मंदिर परिसर पहुंचकर दान गिनने की प्रक्रिया, CCTV फुटेज, कर्मचारियों की नियुक्ति और सुरक्षा व्यवस्था की जांच शुरू की।
SIT की प्रारंभिक जांच में क्या सामने आया?
प्रारंभिक जांच में दान गिनने की प्रक्रिया में कुछ प्रक्रियागत कमियां सामने आने की बात कही गई। रिपोर्ट के अनुसार मानक संचालन प्रक्रिया (SOP), रिकॉर्डिंग व्यवस्था और कर्मचारियों के सत्यापन जैसे पहलुओं की समीक्षा की गई। अंतिम रिपोर्ट अभी आना बाकी है।
FIR में क्या कार्रवाई हुई?
25 जून 2026 को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से राम जन्मभूमि पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई गई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ लोगों को नामजद किया गया है, जबकि अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम एफआईआर में शामिल नहीं है।
बरामदगी और जांच
जांच एजेंसियां कुछ कर्मचारियों और संबंधित लोगों की संपत्ति, नकदी और अन्य दस्तावेजों की भी जांच कर रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में कुछ स्थानों से नकदी बरामद होने के दावे किए गए हैं, जिनकी आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
मामले को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। विपक्षी दलों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है, जबकि विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी मामले की निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं।
ट्रस्ट का पक्ष
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का कहना है कि पहले कराए गए आंतरिक ऑडिट में किसी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी सामने नहीं आई थी। ट्रस्ट ने कहा है कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए उसने स्वयं शिकायतकर्ता बनकर एफआईआर दर्ज कराई है और जांच में पूरा सहयोग दिया जा रहा है।
जांच जारी
फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है। SIT की अंतिम रिपोर्ट और पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति और संभावित जिम्मेदारियों पर स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी.
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