परिमल नाथवानी की शानदार जीत: झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026 में कांग्रेस को बड़ा झटका। क्रॉस वोटिंग ने बदला खेल

झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को हराकर राज्यसभा की एक सीट पर कब्जा जमा लिया। वहीं, दूसरी सीट पर झामुमो के बैद्यनाथ राम ने जीत दर्ज की।
नाथवानी की जीत इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि विधानसभा में स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद इंडिया गठबंधन अपने उम्मीदवार को जिताने में सफल नहीं हो सका। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस परिणाम के पीछे क्रॉस वोटिंग की अहम भूमिका रही।
झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026: कौन जीता, किसे मिले कितने वोट?
राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवारों को मिले वोट इस प्रकार रहे:
- परिमल नाथवानी (एनडीए समर्थित निर्दलीय) – 28 वोट
- प्रणव झा (कांग्रेस) – 20 वोट
- बैद्यनाथ राम (झामुमो) – दूसरी सीट पर विजयी
81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में इंडिया गठबंधन के पास बहुमत होने के बावजूद नाथवानी की जीत ने राजनीतिक समीकरणों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। माना जा रहा है कि महागठबंधन के कम से कम चार विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की, जिससे चुनाव का परिणाम अप्रत्याशित हो गया।
कौन हैं परिमल नाथवानी?
परिमल धीरजलाल नाथवानी भारतीय उद्योग और राजनीति दोनों क्षेत्रों में एक चर्चित नाम हैं। उनका जन्म 1 फरवरी 1956 को गुजरात के जामखंभालिया में हुआ था।
उनकी प्रमुख पहचान:
- रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) में ग्रुप प्रेसिडेंट (कॉर्पोरेट अफेयर्स)।
- झारखंड से दो बार राज्यसभा सांसद रह चुके हैं।
- वर्तमान में आंध्र प्रदेश से राज्यसभा का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
- रिलायंस समूह के कई बड़े प्रोजेक्ट्स में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।
- नामांकन के दौरान घोषित संपत्ति 754 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई थी।
उद्योग जगत में उन्हें रिलायंस समूह और बड़े निवेश प्रोजेक्ट्स से जुड़े प्रभावशाली व्यक्तियों में गिना जाता है।
नाथवानी की जीत क्यों मानी जा रही है अहम?
परिमल नाथवानी की जीत कई राजनीतिक संकेत दे रही है:
1. एनडीए के लिए बड़ी रणनीतिक सफलता
भाजपा ने इस चुनाव में अपना उम्मीदवार नहीं उतारा और नाथवानी को समर्थन दिया। यह रणनीति सफल साबित हुई।
2. महागठबंधन में असंतोष के संकेत
क्रॉस वोटिंग की चर्चा ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या इंडिया गठबंधन के भीतर सब कुछ ठीक है।
3. हेमंत सोरेन सरकार पर बढ़ा दबाव
बहुमत होने के बावजूद उम्मीदवार की हार से विपक्ष को सरकार पर हमला करने का मौका मिल गया है।
4. राज्य की राजनीति में नए समीकरण
इस परिणाम के बाद आने वाले समय में झारखंड की राजनीति में नए गठबंधन और रणनीतियां देखने को मिल सकती हैं।
नामांकन को लेकर भी हुआ था विवाद
राज्यसभा चुनाव के दौरान परिमल नाथवानी के नामांकन को लेकर कांग्रेस और झामुमो ने आपत्ति जताई थी। हालांकि, जांच के बाद चुनाव आयोग ने उनका नामांकन वैध माना और उन्हें चुनाव लड़ने की अनुमति दी।
जीत के बाद क्या बोले परिमल नाथवानी?
जीत के बाद परिमल नाथवानी ने सभी विधायकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा:
“मुझे विभिन्न दलों के विधायकों का समर्थन मिला है। मैं झारखंड के विकास और जनता की सेवा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करूंगा।”
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज
नाथवानी की जीत के बाद भाजपा नेताओं ने इसे एनडीए की बड़ी सफलता बताया है। दूसरी ओर कांग्रेस और झामुमो नेताओं ने क्रॉस वोटिंग की जांच की मांग उठाई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना हैझारखंड राज्यसभा चुनाव 2026 में परिमल नाथवानी की जीत सिर्फ एक चुनावी सफलता नहीं, बल्कि राज्य की राजनीति में बदलते समीकरणों का संकेत भी मानी जा रही है। क्रॉस वोटिंग, गठबंधन की अंदरूनी चुनौतियां और एनडीए की रणनीतिक जीत ने इस चुनाव को बेहद दिलचस्प बना दिया है। अब सभी की नजरें इस बात पर होंगी कि इस परिणाम का झारखंड की राजनीति और सरकार की स्थिरता पर क्या असर पड़ता है।
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