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Friday, March 20, 2026
JHARKHAND NEWS

LPG गैस की कमी और महंगे कोयले पर JMM के सवाल, मोदी सरकार से जवाब की मांग

झारखंड में एलपीजी गैस की कमी और कोयले की बढ़ती कीमतों को लेकर JMM द्वारा केंद्र सरकार की नीतियों पर उठाए गए सवाल दर्शाता दृश्य
JMM ने केंद्र सरकार की नीतियों पर उठाए गंभीर सवाल
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रांची। रांची में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने केंद्र सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाते हुए राज्य में एलपीजी गैस की कमी और कोयले की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंता जताई है। पार्टी का कहना है कि इन दोनों समस्याओं का सीधा असर आम जनता के जीवन पर पड़ रहा है। जेएमएम के महासचिव व प्रवक्ता सुप्रीयो भट्‌टाचार्य ने आरोप लगाया कि राज्य में एलपीजी गैस की आपूर्ति बाधित हो रही है, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई जगहों पर गैस सिलेंडर समय पर नहीं मिल रहे हैं, जिससे घरेलू कामकाज प्रभावित हो रहा है। पार्टी का कहना है कि केंद्र सरकार इस समस्या को गंभीरता से नहीं ले रही है, जबकि गरीब और मध्यम वर्ग इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। उक्त बातें सुप्रीयो ने प्रेस कांफ्रेंस कर दी।

कोयले की कीमतों में वृद्धि पर चिंता

जेएमएम ने कोयले की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को भी बड़ा मुद्दा बताया। पार्टी के अनुसार, कोयला महंगा होने से न सिर्फ उद्योग प्रभावित हो रहे हैं बल्कि आम लोगों के लिए भी वैकल्पिक ईंधन का खर्च बढ़ गया है। राज्य में ऊर्जा संकट की स्थिति बनती जा रही है, क्योंकि एलपीजी की कमी के कारण लोग कोयले और अन्य पारंपरिक ईंधनों पर निर्भर हो रहे हैं।

केंद्र से हस्तक्षेप की मांग

जेएमएम ने केंद्र सरकार से मांग की है कि एलपीजी की आपूर्ति को जल्द सामान्य किया जाए और कोयले की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। पार्टी ने यह भी कहा कि ऊर्जा संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना केंद्र की जिम्मेदारी है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

जनता पर बढ़ता बोझ

राज्य में एलपीजी संकट और कोयले की महंगाई का असर सीधे आम जनता पर पड़ रहा है। लोगों को खाना बनाने के लिए वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे उनका खर्च बढ़ गया है और जीवन स्तर प्रभावित हो रहा है। कुल मिलाकर, झारखंड में ऊर्जा संकट को लेकर सियासत तेज हो गई है। जेएमएम ने जहां केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया है, वहीं अब सबकी नजर इस बात पर है कि इस समस्या के समाधान के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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