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Saturday, October 31, 2026
लोकसभा में पेश रिपोर्ट के अनुसार 2016–2025 के बीच सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों के खिलाफ 8,600 से अधिक शिकायतों से जुड़ी खबर का सांकेतिक चित्र।
फरवरी 2026 में लोकसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार, 2016 से 2025 के बीच सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाई कोर्ट के मौजूदा जजों के खिलाफ 8,600 से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं। यह डेटा ऐसे समय सामने आया है जब राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ के जिक्र को लेकर विवाद हुआ और सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अंश हटाने के निर्देश दिए।
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न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर बहस तेज: 10 वर्षों में 8,600 से अधिक शिकायतें, NCERT विवाद के बीच आंकड़े सामने

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देश में न्यायपालिका की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। लोकसभा में फरवरी 2026 में पेश किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले 10 वर्षों (2016 से 2025) के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के कार्यालय को सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाई कोर्ट के मौजूदा जजों के खिलाफ 8,600 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुई हैं।

यह डेटा ऐसे समय सामने आया है जब राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की कक्षा 8 की किताब में “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” के उल्लेख को लेकर विवाद खड़ा हुआ था और सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अंश हटाने और प्रकाशन पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे।

NCERT विवाद और सुप्रीम कोर्ट की सख्ती

कक्षा 8 की पाठ्यपुस्तक में “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” से जुड़े संदर्भों को लेकर विवाद खड़ा हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए संबंधित अंश हटवाने और प्रकाशन पर रोक लगाने के निर्देश दिए।

यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ जब संसद में जजों के खिलाफ शिकायतों का डेटा भी सार्वजनिक हुआ, जिससे बहस और तीखी हो गई।

शिकायतों के आंकड़े: साल-दर-साल स्थिति

लोकसभा में पेश रिपोर्ट के अनुसार:

  • कुल शिकायतें: लगभग 8,630–8,639 (औसतन 8,600+)
  • सबसे ज्यादा शिकायतें:
    • 2024: 1,170
    • 2025: 1,102
  • अन्य प्रमुख वर्ष:
    • 2019: 1,037
    • 2022: 1,012
  • सबसे कम शिकायतें:
    • 2020: 518

इन आंकड़ों ने न्यायिक जवाबदेही पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि विशेषज्ञों का एक वर्ग यह भी कह रहा है कि बड़ी संख्या में शिकायतें आना इस बात का संकेत है कि शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया उपलब्ध है, और अधिकांश मामलों में जांच के बाद शिकायतें खारिज भी हो जाती हैं।

शिकायत निवारण की प्रक्रिया: कैसे होती है जांच?

1. सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट स्तर

  • सुप्रीम Court के जजों और हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों के खिलाफ शिकायतें CJI को भेजी जाती हैं।
  • हाई कोर्ट के जजों के खिलाफ शिकायतें संबंधित हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस देखते हैं।

2. इन-हाउस मैकेनिज्म

न्यायपालिका के पास आंतरिक जांच तंत्र है।

  • गंभीर मामलों में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की जाती है।
  • आरोप सिद्ध होने पर जज को इस्तीफा देने के लिए कहा जा सकता है।
  • दुर्लभ मामलों में महाभियोग (Impeachment) की सिफारिश होती है।

3. निचली अदालतें

जिला और अधीनस्थ न्यायालयों पर प्रशासनिक नियंत्रण संबंधित राज्य के हाई कोर्ट के पास होता है।

चर्चित मामले जिन्होंने बहस को हवा दी

1. जस्टिस यशवंत वर्मा मामला

मार्च 2025 में दिल्ली हाई कोर्ट के तत्कालीन जज के आवास से लगभग 15 करोड़ रुपये नकद बरामद होने का मामला सामने आया। एक आंतरिक समिति ने उनके खिलाफ महाभियोग की सिफारिश की है।

2. जस्टिस शरद कुमार शर्मा

अगस्त 2025 में उन्होंने एक मामले से खुद को अलग कर लिया, यह आरोप लगाते हुए कि न्यायपालिका के ही एक वरिष्ठ व्यक्ति ने उन पर फैसले को प्रभावित करने का दबाव बनाया था।

3. सौमित्र सेन (2011)

कलकत्ता हाई कोर्ट के जज रहे सौमित्र सेन स्वतंत्र भारत के पहले ऐसे जज थे जिन्हें धन के दुरुपयोग के आरोप में राज्यसभा द्वारा महाभियोग का सामना करना पड़ा। हालांकि उन्होंने लोकसभा की कार्यवाही से पहले इस्तीफा दे दिया था।

सरकार बनाम न्यायपालिका: पुराना विवाद फिर चर्चा में

न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर सरकार और न्यायपालिका के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं।

  • जगदीप धनखड़ ने समय-समय पर न्यायिक सक्रियता पर टिप्पणी की है।
  • किरण रिजिजू ने कॉलेजियम प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठाए थे।
  • राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) बनाम कॉलेजियम प्रणाली को लेकर विवाद पहले भी सुर्खियों में रहा है।
  • क्या कहता है यह डेटा?
  • यह आंकड़ा दो तरह की बहस को जन्म देता है:
  • आलोचना का पक्ष:
    इतनी बड़ी संख्या में शिकायतें न्यायिक व्यवस्था में संभावित खामियों की ओर इशारा करती हैं।
  • समर्थन का पक्ष:
    शिकायतों की अधिक संख्या यह भी दर्शा सकती है कि शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया खुली है और पारदर्शिता के प्रयास जारी हैं। अधिकांश मामलों में जांच के बाद शिकायतें खारिज हो जाती हैं।

न्यायपालिका लोकतंत्र का एक मजबूत स्तंभ मानी जाती है। ऐसे में 10 वर्षों में 8,600 से अधिक शिकायतों का सामने आना और उसी समय NCERT विवाद का उठना, पारदर्शिता और जवाबदेही की बहस को और तेज करता है।

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भविष्य में न्यायिक सुधार, नियुक्ति प्रक्रिया और शिकायत निवारण तंत्र को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।

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