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Saturday, November 7, 2026
झारखंड के राजमहल हिल्स में जुरासिक काल के जीवाश्म और खनन गतिविधि का दृश्य।
झारखंड के राजमहल हिल्स में 145 मिलियन साल पुराने पौधों के जीवाश्म मिले हैं, लेकिन अफसोस... पत्थर खनन इन्हें तबाह कर रहा है। अब इन 'कुदरती तिजोरियों' को बचाने के लिए नई मुहिम शुरू हुई है।
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झारखंड के जुरासिक काल के जीवाश्मों पर खतरा: 13 साइट्स को बचाने के लिए सरयू राय लाएंगे विधेयक, वन विभाग करेगा सर्वे

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झारखंड की धरती अपने गर्भ में करोड़ों साल पुराना इतिहास समेटे हुए है। राज्य के राजमहल हिल्स (Rajmahal Hills) सहित 13 प्रमुख स्थलों पर पाए जाने वाले जुरासिक काल के जीवाश्म (Jurassic Era Fossils) आज अवैध खनन और अनदेखी के कारण अस्तित्व के संकट से जूझ रहे हैं। 68 से 145 मिलियन वर्ष पुराने इन पौधों के अवशेषों को बचाने के लिए अब सरकार और जनप्रतिनिधि सक्रिय हो गए हैं।

खनन और अवैध गतिविधियों से संकट में प्राकृतिक धरोहर

भू-गर्भशास्त्रियों और विशेषज्ञों के अनुसार, झारखंड के ये जीवाश्म न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से बल्कि वैश्विक पर्यटन के लिहाज से भी अनमोल हैं। प्रोफेसर नीतीश प्रियदर्शी के मुताबिक, पत्थर खनन और अयस्क परिवहन के कारण इन जीवाश्मों की संरचना टूट रही है। कई साइट्स पर भारी मशीनों के चलने से ये ऐतिहासिक अवशेष मिट्टी में मिलकर नष्ट हो रहे हैं।

विधायक सरयू राय का बड़ा कदम: विधानसभा में आएगा विधेयक

पर्यावरण संरक्षण के लिए मुखर रहने वाले विधायक सरयू राय आगामी बजट सत्र (फरवरी-मार्च 2026) में इन जीवाश्मों के संरक्षण के लिए एक विशेष विधेयक पेश करने जा रहे हैं।

  • मुख्य उद्देश्य: खनन गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण और जीवाश्म स्थलों की कानूनी सुरक्षा।
  • सख्ती: नियमों का उल्लंघन करने वाली खनन कंपनियों पर भारी जुर्माना और प्रतिबंधित क्षेत्रों का निर्धारण।
  • विरासत: सरयू राय का मानना है कि यदि अभी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो झारखंड अपनी इस अद्वितीय प्राकृतिक संपदा को हमेशा के लिए खो देगा।

झारखंड के प्रमुख जीवाश्म स्थल (Fossil Sites at a Glance)

राज्य में कुल 13 प्रमुख स्थल चिन्हित किए गए हैं, जिनका विवरण नीचे तालिका में दिया गया है:

जिलाप्रमुख स्थल/क्षेत्रविशेषता
साहिबगंजराजमहल हिल्स, मंड्रो, बरहरवासबसे बड़ा क्षेत्र, ग्लोसोप्टेरिस पौधों के अवशेष।
पाकुड़सोनाजोरी हिल्स, निपानियादुर्लभ जुरासिक पौधों के जीवाश्म।
गुमलाविभिन्न नदी तटअनअधिसूचित साइट्स, वन विभाग की रडार पर।
सिमडेगा/खूंटीनदी किनारे के क्षेत्रप्राचीन भौगोलिक संरचना के प्रमाण।
लोहरदगा/पलामूखनन प्रभावित क्षेत्रपत्थर खनन से सबसे अधिक खतरे में।

मंड्रो फॉसिल पार्क: संरक्षण की एक मिसाल

साहिबगंज में स्थित मंड्रो फॉसिल पार्क (Mandro Fossil Park) झारखंड का पहला ऐसा प्रयास है जहाँ जीवाश्मों को सहेजने की कोशिश की गई है। 10.79 करोड़ रुपये की लागत से बने इस पार्क में करोड़ों साल पुराने पेड़ों के तनों (Petrified wood) को प्रदर्शित किया गया है। वन विभाग अब इसी तर्ज पर अन्य 12 साइट्स को भी विकसित करने और उन्हें UNESCO विश्व धरोहर की सूची में शामिल कराने का लक्ष्य रख रहा है।

वैज्ञानिक और पर्यटन महत्व

ये जीवाश्म गोंडवाना महाद्वीप के टूटने और भारतीय उपमहाद्वीप के विकास की कहानी सुनाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि:

  1. ये जीवाश्म प्राचीन जलवायु (Paleoclimate) के अध्ययन में मदद करते हैं।
  2. इन क्षेत्रों को ‘जियो-टूरिज्म’ (Geo-tourism) के रूप में विकसित कर स्थानीय रोजगार पैदा किया जा सकता है।

वन विभाग की कार्ययोजना

वन एवं पर्यावरण विभाग ने स्पष्ट किया है कि जल्द ही सभी 13 साइट्स का विस्तृत सर्वेक्षण कराया जाएगा। नए स्थलों को सरकारी गजट में अधिसूचित कर वहां सुरक्षा घेरा बनाया जाएगा। राज्य सरकार की इस पहल से उम्मीद जगी है कि झारखंड के ‘जुरासिक पार्क’ को खनन माफियाओं के चंगुल से बचाया जा सकेगा।

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