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Saturday, April 5, 2025
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सुप्रीम कोर्ट में वक्फ संशोधन विधेयक को चुनौती

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रांची। कांग्रेस के लोकसभा सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद ने वक्फ संशोधन विधेयक को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। यह विधेयक संसद से पारित होने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार कर रहा है। याचिका में दावा किया गया है कि यह कानून मुसलमानों के साथ भेदभावपूर्ण है और संविधान के कई मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।

मुख्य आपत्तियां

  1. सरकारी दखल बढ़ने का डर: याचिका के अनुसार, संशोधन से वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सरकारी हस्तक्षेप बढ़ेगा। अब तक वक्फ बोर्ड संपत्ति के स्वरूप पर फैसला लेता था, लेकिन नए प्रावधानों के तहत यह अधिकार जिला कलेक्टर को मिल जाएगा। जावेद का कहना है कि अन्य धर्मों के ट्रस्टों को यह स्वायत्तता है, पर मुस्लिम संस्थाओं के साथ भेदभाव किया जा रहा है।
  2. 5 साल के मुस्लिम होने की शर्त: विधेयक में वक्फ बनाने वाले व्यक्ति के लिए कम से कम 5 साल से मुस्लिम होने की अनिवार्यता है। याचिका में इसे इस्लामी कानून के विरुद्ध बताया गया है, क्योंकि इस्लाम किसी व्यक्ति के धर्म अपनाने की अवधि पर कोई पाबंदी नहीं लगाता। इससे धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) और समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14, 15) का हनन होता है।
  3. गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति: वक्फ बोर्ड और केंद्रीय वक्फ परिषद में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने का प्रावधान भी विवादित है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि अन्य धर्मों की धार्मिक संस्थाओं में ऐसा नहीं होता, जिससे मुसलमानों के साथ असमान व्यवहार हो रहा है।
  4. इस्लामिक विद्वानों की भूमिका घटना: वक्फ ट्रिब्यूनल में इस्लामिक विद्वानों की संख्या कम करने को भी चुनौती दी गई है। जावेद के अनुसार, यह कदम वक्फ से जुड़े धार्मिक और कानूनी मामलों के निपटारे को प्रभावित करेगा।

संवैधानिक विरोध
याचिका में कहा गया है कि यह विधेयक अनुच्छेद 14 (समानता), 15 (धर्म के आधार पर भेदभाव निषेध), 25-26 (धार्मिक स्वतंत्रता), 29 (अल्पसंख्यक अधिकार), और 300A (संपत्ति का अधिकार) का उल्लंघन करता है। वकील अनस तनवीर के माध्यम से दायर इस याचिका में सुप्रीम कोर्ट से संशोधन कानून को रद्द करने की मांग की गई है।

कई राज्यों में हुआ विरोध प्रदर्शन

वक्फ संशोधन बिल के पास होने के बाद देश के कई हिस्सों में मुस्लिम समाज के लोग सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किए। कोलकाता, हैदराबाद, मुंबई समेत देश के अलग-अलग स्थानों पर वक्फ बिल के खिलाफ मुस्लिम संगठन प्रदर्शन किए। कोलकाता के पार्क सर्कस क्रॉसिंग पर अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों ने विरोध प्रदर्शन किया और वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को तत्काल वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनों के कारण क्षेत्र में यातायात बाधित हो गया और बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर जमा हो गए। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी वक्फ विधेयक पेश करने के लिए बीजेपी की आलोचना की है और उस पर देश को बांटने का प्रयास करने का आरोप लगाया। कर्नाटक, अहमदाबाद और हैदराबाद समेत कई राज्यों में इस बिल के खिलाफ प्रदर्शन हुआ।

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