दुनिया के सबसे सूखे रेगिस्तान में बर्फ की चादर, फिर दिखा कपड़ों का पहाड़… अटाकामा की कहानी हैरान कर देगी

दुनिया में कुछ जगहें ऐसी हैं, जहां प्रकृति और इंसानी गतिविधियों की तस्वीर एक साथ दिखाई देती है। दक्षिण अमेरिका के चिली में मौजूद अटाकामा रेगिस्तान ऐसी ही एक जगह है। दुनिया के सबसे शुष्क इलाकों में गिने जाने वाले इस रेगिस्तान ने कभी अचानक बर्फ की चादर ओढ़कर वैज्ञानिकों को चौंकाया, तो दूसरी तरफ यही जगह दुनिया भर से फेंके गए कपड़ों के विशाल ढेर के लिए भी चर्चा में रही है।
यानी एक तरफ प्रकृति का दुर्लभ नजारा है और दूसरी तरफ इंसानों की बढ़ती Fast Fashion की समस्या। अटाकामा की कहानी इसी विरोधाभास को सामने लाती है।
जहां बारिश भी बेहद कम, वहां बर्फ कैसे गिरी?
अटाकामा उत्तरी चिली में स्थित है और इसे धरती के सबसे शुष्क गैर-ध्रुवीय क्षेत्रों में गिना जाता है। यहां सामान्य परिस्थितियों में बारिश बेहद कम होती है।
लेकिन 2026 में लगातार आए दो शीतकालीन तूफानों ने इस इलाके का नजारा बदल दिया। एंडीज पर्वतों से नमी लेकर आए मौसम तंत्र ने रेगिस्तान के बड़े हिस्से को बर्फ से ढक दिया। NASA की सैटेलाइट तस्वीरों में बर्फ का विस्तार एंडीज से लेकर प्रशांत महासागर के करीब तक दिखाई दिया।
दिलचस्प बात यह रही कि बर्फ सिर्फ ऊंचे पहाड़ी इलाकों तक सीमित नहीं रही। प्रशांत तट के नजदीक भी कुछ क्षेत्रों में बर्फ और भारी बारिश देखने को मिली।
अटाकामा में इतनी बारिश भी असामान्य
इस मौसम प्रणाली के दौरान उत्तरी चिली के कुछ इलाकों में भारी बारिश भी हुई। तटीय शहर Taltal में तीन दिनों के दौरान करीब 40 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो वहां के सामान्य वार्षिक औसत से कई गुना ज्यादा थी। भारी बारिश के कारण कुछ क्षेत्रों में अचानक बाढ़ और मलबे के बहाव जैसी स्थिति भी बनी।
मौसम वैज्ञानिकों ने इस असामान्य स्थिति के पीछे दुर्लभ वायुमंडलीय परिस्थितियों और El Niño के प्रभाव को संभावित कारणों में शामिल किया।
लेकिन अटाकामा की कहानी सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं है।
इसी रेगिस्तान में जमा है कपड़ों का पहाड़
अटाकामा के Alto Hospicio और Iquique इलाके में दुनिया भर से आने वाले पुराने और बिना बिके कपड़ों का विशाल कचरा जमा होता रहा है।
चिली लैटिन अमेरिका में इस्तेमाल किए गए कपड़ों का सबसे बड़ा आयातक है। Iquique के फ्री-ट्रेड ज़ोन में यूरोप, एशिया और अमेरिका से बड़ी मात्रा में कपड़े पहुंचते हैं। जो कपड़े दोबारा बिक जाते हैं, वे बाजार में चले जाते हैं, लेकिन बड़ी मात्रा में ऐसा कपड़ा भी बच जाता है जिसका कोई खरीदार नहीं मिलता।
यही कपड़े आखिरकार रेगिस्तान के खुले इलाकों में फेंक दिए जाते हैं।
एक अध्ययन के मुताबिक अटाकामा क्षेत्र में हर साल दसियों हजार टन कपड़ा कचरा जमा होता है और लगभग 300 हेक्टेयर क्षेत्र इससे प्रभावित हो चुका है। कुछ जगहों पर इस कचरे को जलाया भी जाता है।
नए कपड़ों के टैग तक मिल जाते हैं
इस कहानी का सबसे हैरान करने वाला हिस्सा यह है कि इन ढेरों में केवल पुराने या फटे कपड़े ही नहीं होते। कई बार ऐसे कपड़े भी मिलते हैं जो बिके ही नहीं और टैग के साथ फेंक दिए गए।
यही वजह है कि अटाकामा को फास्ट फैशन के पर्यावरणीय प्रभाव का एक बड़ा उदाहरण माना जाता है। दुनिया में कपड़ों का उत्पादन और इस्तेमाल जितनी तेजी से बढ़ रहा है, उतनी ही तेजी से कपड़ा कचरा भी बढ़ रहा है।
लेकिन अब इसी कचरे से बन रहा है कुछ उपयोगी
कहानी का सकारात्मक हिस्सा भी है।
चिली में EcoFibra जैसी पहलें फेंके गए कपड़ों को कचरे की बजाय कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल कर रही हैं। कपड़ों को छांटकर, उनमें मौजूद बटन और जिप जैसी चीजें अलग की जाती हैं। इसके बाद कपड़े को काटकर दबाया जाता है और उससे इंसुलेशन पैनल तैयार किए जाते हैं।
इन पैनलों का इस्तेमाल इमारतों में गर्मी और आवाज को नियंत्रित करने के लिए किया जा सकता है। यानी जिस कपड़े को कभी रेगिस्तान में फेंक दिया जाना था, वही किसी घर की दीवार में उपयोगी सामग्री बन सकता है।
समस्या कितनी बड़ी है?
यहीं पर इस पूरी कहानी की सबसे बड़ी चुनौती सामने आती है।
एक छोटी फैक्ट्री रोजाना कई टन कपड़ा प्रोसेस कर सकती है, लेकिन अटाकामा में पहुंचने वाले कपड़ों की मात्रा उससे कहीं ज्यादा है। इसलिए सिर्फ Recycling से समस्या खत्म नहीं होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि समाधान कपड़े फेंकने के बाद शुरू होने के बजाय कपड़े के उत्पादन और आयात के स्तर पर शुरू होना चाहिए।
यानी कंपनियों को यह सोचना होगा कि कितना उत्पादन किया जाए, कितना दोबारा इस्तेमाल हो सकता है और जो कपड़ा बाजार में नहीं बिकता, उसका क्या होगा।
बर्फ और कपड़ों के पहाड़ के बीच छिपा बड़ा सवाल
अटाकामा की तस्वीरें हमें दो बिल्कुल अलग कहानियां दिखाती हैं।
एक तस्वीर में धरती के सबसे सूखे इलाकों में से एक रेगिस्तान अचानक बर्फ से ढका नजर आता है। दूसरी तस्वीर में उसी जमीन पर इंसानों के फेंके हुए कपड़ों का पहाड़ दिखाई देता है।
एक तरफ प्रकृति का ऐसा बदलाव जिसे देखकर वैज्ञानिक भी हैरान हैं, दूसरी तरफ इंसानों की ऐसी आदत जिसका असर पर्यावरण पर लंबे समय तक रह सकता है।
अटाकामा इसलिए सिर्फ एक रेगिस्तान नहीं रह गया है। यह आज Climate, Waste और Fast Fashion—तीनों की कहानी एक साथ बताने वाली जगह बन चुका है।
आखिर हमें इससे क्या सीखना चाहिए?
कपड़े खरीदना और पहनना रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है, लेकिन उनकी कहानी खरीदारी के बाद खत्म नहीं होती। जो कपड़ा हम इस्तेमाल नहीं करते, वह कहीं न कहीं जाता है।
अटाकामा का कपड़ों का पहाड़ यही सवाल पूछता है—क्या हम जरूरत से ज्यादा कपड़े बना और खरीद रहे हैं, या ऐसी व्यवस्था बना सकते हैं जिसमें पुराने कपड़े दोबारा इस्तेमाल हों और कचरा कम से कम बने?
शायद इसी सवाल का जवाब अटाकामा में शुरू हो चुकी छोटी-छोटी Recycling पहलों में छिपा है।
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