West Asia War: ईरान पर फिर अमेरिका का हमला, Larak Island पर रॉकेट लॉन्चर तबाह; Hormuz को लेकर तनाव बढ़ा

पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध में एक बार फिर तनाव तेजी से बढ़ गया है। अमेरिका ने ईरान के Larak Island पर दो रॉकेट लॉन्चर को निशाना बनाया है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक इन लॉन्चरों से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी की जा रही थी। यह एक महीने से ज्यादा समय बाद ईरानी क्षेत्र में अमेरिका की पहली ज्ञात सीधी सैन्य कार्रवाई बताई जा रही है।
Larak Island पर अमेरिका ने क्यों किया हमला?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। अमेरिकी सेना का दावा है कि ईरानी बल रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण Strait of Hormuz में समुद्री सुरंगें बिछाने के लिए रॉकेट लॉन्च करने की तैयारी कर रहे थे।
इसी खतरे को देखते हुए अमेरिकी सेना ने Larak Island पर दो लॉन्चर को निशाना बनाया। अमेरिकी अधिकारियों ने इसे सीमित और सटीक कार्रवाई बताया है।
ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की धमकी
अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी। रिपोर्टों के मुताबिक ईरान की ओर से जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले का दावा भी सामने आया है। शुरुआती रिपोर्टों में अधिकांश आने वाली मिसाइलों को रोक लिए जाने की बात कही गई है।
इस घटनाक्रम ने छह महीने से जारी संघर्ष में तनाव को एक बार फिर बढ़ा दिया है।
Trump ने Kharg Island को लेकर क्या कहा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के Kharg Island को लेकर भी बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि खार्ग द्वीप को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। खार्ग ईरान के तेल निर्यात के लिए बेहद महत्वपूर्ण केंद्र है और युद्ध से पहले ईरान के अधिकांश तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से संभाला जाता था।
हालांकि, खार्ग पर हमले से जुड़े ट्रंप के दावे के बारे में अभी विस्तृत स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
Strait of Hormuz पर क्यों है पूरी दुनिया की नजर?
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। युद्ध से पहले वैश्विक कच्चे तेल और LNG व्यापार का करीब पांचवां हिस्सा इस रास्ते से गुजरता था। युद्ध और सुरक्षा संकट के बाद यहां से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों की संख्या काफी कम हो गई है।
अमेरिका का कहना है कि वह इस समुद्री रास्ते में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना चाहता है। दूसरी ओर ईरान ने हॉर्मुज को लेकर अपनी शर्तें रखी हैं और कहा है कि अमेरिका को पहले अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी करनी होंगी।
हॉर्मुज में टैंकर पर माइन से हमले का दावा
तनाव के बीच ईरानी IRGC ने दावा किया है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजरने की कोशिश कर रहे एक सुपरटैंकर से दो नौसैनिक बारूदी सुरंगें टकराईं, जिसके बाद जहाज में आग लग गई और वह रुक गया। ईरानी पक्ष का कहना है कि जहाज बिना अनुमति जलमार्ग पार करने की कोशिश कर रहा था। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
छह महीने से जारी है युद्ध
अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद शुरू हुआ यह संघर्ष अब छह महीने से अधिक समय तक खिंच चुका है। हाल के दिनों में कुछ समय के लिए सीधे अमेरिकी हमलों में कमी आई थी, लेकिन Larak Island पर कार्रवाई के बाद एक बार फिर सैन्य तनाव बढ़ गया है।
भारत पर भी पड़ सकता है असर
हॉर्मुज में लंबे समय तक तनाव रहने का सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति, शिपिंग लागत और ऊर्जा कीमतों पर पड़ सकता है। भारत भी अपनी बड़ी ऊर्जा जरूरतों के कारण इस घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रहा है। तेल की कीमतों में तेज उछाल आने पर इसका असर पेट्रोल-डीजल, महंगाई और परिवहन लागत पर पड़ सकता है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि ईरान अमेरिकी हमले का कितना बड़ा जवाब देता है और क्या हॉर्मुज के आसपास वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही और प्रभावित होगी। यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई बढ़ती है, तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित न रहकर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।
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