चंबल घाट पर DM का औचक निरीक्षण। अवैध खनन पर सख्त चेतावनी। कैमरों से होगी निगरानी

आगरा के पिनाहट क्षेत्र में चंबल घाटों पर अवैध खनन को लेकर प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। जिलाधिकारी मनीष बंसल ने बुधवार को चंबल घाट का औचक निरीक्षण किया और अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए। उन्होंने साफ कहा कि उत्तर प्रदेश की सीमा में चंबल नदी के घाटों पर किसी भी स्थिति में अवैध खनन नहीं होना चाहिए।
DM ने मौके पर लिया अवैध खनन का जायजा
डीएम मनीष बंसल ने पिनाहट स्थित चंबल घाट पहुंचकर तहसील प्रशासन और वन विभाग के अधिकारियों से अवैध खनन की स्थिति की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को लगातार निगरानी रखने और जरूरत पड़ने पर औचक जांच करने के निर्देश दिए।
प्रशासन के मुताबिक चंबल नदी के यूपी सीमा वाले घाटों पर खनन प्रतिबंधित है। इसके बावजूद अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है।
पुलिस, वन और खनन विभाग की संयुक्त पेट्रोलिंग
अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए वन विभाग, खनन विभाग और पुलिस की संयुक्त पेट्रोलिंग की जा रही है। इसके अलावा घाटों की निगरानी के लिए विशेष कैमरे भी लगाए गए हैं।
डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वन और राजस्व भूमि का सीमांकन भी कराया जाए, ताकि अवैध गतिविधियों पर प्रभावी तरीके से कार्रवाई की जा सके।
मोटरबोट संचालन का मुद्दा भी उठा
निरीक्षण के दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने चंबल नदी पर मोटरबोट संचालन बंद होने का मुद्दा भी जिलाधिकारी के सामने रखा। ग्रामीणों के मुताबिक इससे दोनों राज्यों के करीब 150 गांवों के लोगों को परेशानी हो रही है।
डीएम ने कहा कि इस मामले में मध्य प्रदेश प्रशासन से बातचीत कर समस्या का समाधान कराने का प्रयास किया जाएगा।
16 अगस्त की घटना के बाद बढ़ी चिंता
मोटरबोट संचालन से जुड़ी सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन के सामने चुनौती है। 16 अगस्त को मध्य प्रदेश के नगरा से बाह के कैंजराघाट की ओर 64 यात्रियों को लेकर जा रही मोटरबोट का इंजन बंद हो गया था। नाव बहते हुए करीब 5 किलोमीटर दूर भिंड के कच्छपुरा कनेरा क्षेत्र तक पहुंच गई थी। बाद में मोटरबोट को लेकर कार्रवाई भी की गई थी।
चंबल घाट पर डीएम के औचक निरीक्षण के बाद अवैध खनन के खिलाफ प्रशासन का रुख साफ हो गया है। संयुक्त पेट्रोलिंग, निगरानी कैमरों और लगातार निरीक्षण के जरिए घाटों पर नजर रखने की तैयारी है। अब देखना होगा कि इन सख्त निर्देशों का जमीन पर कितना असर दिखाई देता है।
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