नेपाल में जलप्रलय से तबाही, बिहार तक बढ़ा बाढ़ का खतरा; गंडक-कोसी किनारे हाई अलर्ट

नेपाल में बुधवार सुबह अचानक आई भीषण फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचा दी है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास भोटेकोशी नदी में अचानक पानी बढ़ने से रसुवा जिले के टिमुरे समेत कई इलाकों में घर, वाहन, सड़क और पुल प्रभावित हुए हैं। कई लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इस बीच नेपाल से आने वाली नदियों को देखते हुए बिहार के कई जिलों में भी अलर्ट बढ़ा दिया गया है।
नेपाल में अचानक बढ़ा नदी का पानी, मची तबाही
बुधवार सुबह करीब 9 बजे के बाद रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। बाढ़ का असर टिमुरे और आसपास के इलाकों में सबसे ज्यादा दिखाई दिया। कई जगह सड़कें और पुल बह गए, जबकि बाजार और रिहायशी इलाकों में पानी घुस गया। नेपाल की सेना और सुरक्षा एजेंसियां राहत एवं बचाव अभियान में जुटी हैं।
ताजा रिपोर्टों में मृतकों की संख्या अलग-अलग बताई जा रही है और स्थिति लगातार बदल रही है। नेपाल में कम से कम आठ-नौ शव मिलने की रिपोर्ट है, जबकि कई सुरक्षा कर्मियों समेत दर्जनों लोग लापता हैं। राहत टीमों को प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में भी मुश्किल आ रही है।
कई पुलिसकर्मी भी लापता
बाढ़ की चपेट में नेपाल के सुरक्षा बलों के जवान भी आए हैं। रसुवा के टिमुरे और आसपास तैनात नेपाल पुलिस तथा सशस्त्र पुलिस बल के कई जवानों से संपर्क टूट गया है। अलग-अलग अपडेट में लापता जवानों की संख्या बदलती रही है, इसलिए फिलहाल अंतिम आधिकारिक आंकड़ा स्पष्ट नहीं है।
बचाव के लिए हेलीकॉप्टरों की मदद ली जा रही है। नेपाल की सेना के मुताबिक कई लोगों को सुरक्षित निकाला भी गया है, लेकिन खराब हालात और क्षतिग्रस्त संपर्क मार्गों के कारण अभियान चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
नेपाल की बाढ़ से बिहार क्यों परेशान?
नेपाल में आई इस आपदा का असर भारत के बिहार पर भी पड़ सकता है, क्योंकि बिहार की कई प्रमुख नदियों के जलग्रहण क्षेत्र नेपाल में हैं।
खास तौर पर गंडक और कोसी नदियों के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। नेपाल में पानी बढ़ने पर उसका असर नीचे की ओर बिहार के सीमावर्ती और निचले इलाकों में दिखाई दे सकता है। बिहार प्रशासन ने संभावित खतरे को देखते हुए निगरानी बढ़ा दी है।
इन जिलों में ज्यादा सतर्कता
गंडक बेसिन से जुड़े पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण और वैशाली जिलों पर विशेष नजर रखी जा रही है।
वहीं कोसी बेसिन में सुपौल, सहरसा, मधेपुरा और अररिया जैसे जिलों को भी संवेदनशील माना जा रहा है। प्रशासन को तटबंधों, नदी के जलस्तर और निचले इलाकों में संभावित जलभराव पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
गंडक बैराज को लेकर भी विशेष निर्देश
संभावित अतिरिक्त पानी को देखते हुए गंडक बैराज के गेटों के संचालन को लेकर भी सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। उद्देश्य यह है कि अगर नेपाल से पानी का प्रवाह बढ़ता है तो उसे नियंत्रित तरीके से आगे निकाला जा सके और अचानक पानी का दबाव न बढ़े।
बिहार के आधिकारिक रियल-टाइम फ्लड अलर्ट सिस्टम में 26 अगस्त को कुछ स्थानों पर गंगा और गंडक का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया है। उदाहरण के लिए लालगंज में गंडक और साहिबगंज तथा सुल्तानगंज क्षेत्र में गंगा के स्तर को लेकर अलर्ट स्थिति दिखाई गई।
SSB की रेस्क्यू टीमें भी अलर्ट
भारत-नेपाल सीमा पर तैनात सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने भी अपनी तैयारियां बढ़ा दी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 11 रेस्क्यू एंड रिलीफ टीमों को अलर्ट किया गया है और अतिरिक्त टीमें स्टैंडबाय पर रखी गई हैं। जरूरत पड़ने पर ये टीमें स्थानीय प्रशासन के साथ राहत और बचाव अभियान में शामिल हो सकती हैं।
अभी सबसे बड़ा खतरा क्या है?
फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यह है कि नेपाल में पहाड़ी इलाकों से आने वाला अतिरिक्त पानी नीचे की ओर बढ़ सकता है। हालांकि, नदी का पानी रास्ते में फैलने और प्रवाह कम होने की संभावना रहती है, लेकिन बिहार के निचले और नदी किनारे बसे इलाकों में अचानक जलस्तर बढ़ने का खतरा बना हुआ है।
इसलिए प्रशासन की नजर सिर्फ नेपाल की बाढ़ पर नहीं, बल्कि गंडक, कोसी और गंगा के जलस्तर पर भी है।
अभी स्थिति पर नजर रखना जरूरी
नेपाल में बाढ़ से हुए नुकसान का पूरा आकलन अभी नहीं हो पाया है और लापता लोगों की संख्या भी बदल रही है। इसी तरह बिहार में भी संभावित असर का आकलन लगातार किया जा रहा है।
ऐसे में नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को प्रशासन की चेतावनियों पर ध्यान देना चाहिए और बिना जरूरत नदी या बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की ओर नहीं जाना चाहिए।
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