घर में आशीर्वाद आटा आता है? हाईकोर्ट के इस फैसले को जरूर जानें, क्या है ‘100% Atta’ का सच?

अगर आप घर में आशीर्वाद आटा इस्तेमाल करते हैं तो यह खबर आपके लिए जरूरी है। आशीर्वाद आटा बनाने वाली कंपनी ITC को दिल्ली हाईकोर्ट से फिलहाल बड़ी राहत मिली है। आटा पैकेट पर किए गए ‘100 प्रतिशत आटा’ जैसे दावों को लेकर Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) की कार्रवाई के बाद कंपनी का लाइसेंस रद्द किए जाने का मामला कोर्ट पहुंचा था। अब हाईकोर्ट ने FSSAI से कहा है कि वह फिलहाल ITC का लाइसेंस रद्द करने की दिशा में कोई अंतिम फैसला न ले।
क्या है आशीर्वाद आटा का पूरा विवाद?
यह पूरा मामला आशीर्वाद आटा के पैकेट और उसके विज्ञापनों पर किए जा रहे ‘100% Atta’, ‘100% Madhya Pradesh Wheat’ और ‘0% Maida’ जैसे दावों से जुड़ा है।
FSSAI ने खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग और विज्ञापन में ‘100 प्रतिशत’ जैसे दावों के इस्तेमाल को लेकर एडवाइजरी जारी की थी। इसके बाद ITC को अपने उत्पादों के पैकेट, विज्ञापन और वेबसाइट पर किए जा रहे दावों को लेकर नोटिस भेजा गया।
कंपनी ने FSSAI की इस कार्रवाई को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। ITC का कहना है कि FSSAI की एडवाइजरी के आधार पर इस तरह की कार्रवाई और लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया को कानूनी आधार नहीं दिया जा सकता।
ITC को मिले नोटिस के बाद बढ़ा मामला
रिपोर्ट के मुताबिक ITC ने 10 अगस्त को जारी शो-कॉज नोटिस और 13 अगस्त के इम्प्रूवमेंट नोटिस को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
कंपनी की दलील है कि ‘100 प्रतिशत’ दावों को लेकर FSSAI की नई एडवाइजरी मौजूदा कानूनी प्रावधानों के दायरे से बाहर है। इसी वजह से कंपनी ने अदालत से इस कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की।
मामले की सुनवाई जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में हुई। कोर्ट ने FSSAI को नोटिस जारी करते हुए फिलहाल ITC के लाइसेंस को रद्द करने की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाने को कहा है।
हाईकोर्ट के आदेश का मतलब क्या है?
इस आदेश का सीधा मतलब यह नहीं है कि कोर्ट ने आशीर्वाद आटा के ‘100%’ दावे को सही ठहरा दिया है।
फिलहाल अदालत ने सिर्फ इतना सुनिश्चित किया है कि अगली सुनवाई तक FSSAI इस मामले में ITC का लाइसेंस रद्द करने का अंतिम फैसला न ले।
यानी कंपनी को अंतरिम राहत मिली है, जबकि विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है।
अब 9 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर 2026 को होगी। उस दौरान FSSAI की कार्रवाई, उसकी एडवाइजरी और ITC की दलीलों पर आगे सुनवाई होगी।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि खाद्य कंपनियों को अपने उत्पादों की पैकेजिंग और विज्ञापन में ‘100 प्रतिशत’ जैसे दावे करने से रोकने के लिए FSSAI की एडवाइजरी को किस तरह लागू किया जा सकता है।
ग्राहकों के लिए क्या समझना जरूरी है?
आशीर्वाद आटा को लेकर चल रहा यह विवाद फिलहाल लाइसेंस रद्द होने का मामला है, न कि ऐसा आदेश जिसमें कोर्ट ने आटे को असुरक्षित घोषित किया हो।
इसलिए सोशल मीडिया पर अगर इस खबर को लेकर यह दावा किया जाए कि ‘आशीर्वाद आटा खाने पर रोक लग गई है’ या ‘आटा खराब पाया गया है’, तो उसे सही नहीं माना जाना चाहिए। मौजूदा मामले का केंद्र उत्पाद की पैकेजिंग और उस पर किए गए दावों को लेकर FSSAI की कार्रवाई है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
खाद्य उत्पादों पर लिखे गए दावे सीधे ग्राहकों के खरीदारी के फैसले को प्रभावित करते हैं। ‘100%’, ‘नो मैदा’ या इसी तरह के दावे उपभोक्ता को उत्पाद की गुणवत्ता और सामग्री के बारे में एक खास धारणा देते हैं।
इसी वजह से FSSAI की कार्रवाई सिर्फ ITC तक सीमित मामला नहीं है। इससे भविष्य में दूसरे FMCG ब्रांड्स की पैकेजिंग और विज्ञापन में किए जाने वाले दावों पर भी असर पड़ सकता है।
फिलहाल ITC को हाईकोर्ट से राहत मिल गई है और आशीर्वाद आटा का लाइसेंस तत्काल रद्द नहीं होगा। लेकिन ‘100 प्रतिशत’ दावे को लेकर FSSAI और ITC के बीच कानूनी विवाद अभी जारी है। 9 सितंबर की सुनवाई में इस मामले की अगली तस्वीर साफ हो सकती है।
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