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Tuesday, August 25, 2026
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मुंबई में मराठी भाषा नियम पर बवाल, ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों की 3 दिन की हड़ताल; यात्रियों की बढ़ी परेशानी

मुंबई में मराठी भाषा नियम के विरोध में ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों की हड़ताल
मराठी भाषा नियम को लेकर मुंबई में ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों का विरोध, यात्रियों की बढ़ी परेशानी।
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महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और ऐप आधारित कैब ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा के कामचलाऊ ज्ञान को अनिवार्य किए जाने का विवाद अब सड़क पर उतर आया है। मुंबई और आसपास के इलाकों में ड्राइवरों के एक वर्ग ने इस नियम के विरोध में तीन दिन की हड़ताल शुरू कर दी है। इसके चलते कई इलाकों में ऑटो और टैक्सियों की उपलब्धता घट गई है और यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

क्यों शुरू हुआ विवाद?

महाराष्ट्र सरकार ने 12 अगस्त 2026 को महाराष्ट्र मोटर व्हीकल रूल्स में संशोधन करते हुए कमर्शियल पैसेंजर व्हीकल ड्राइवरों के लिए मराठी का कामचलाऊ ज्ञान जरूरी किया। इसमें ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और इलेक्ट्रॉनिक मीटर वाली ऐप आधारित कैब के ड्राइवर शामिल हैं। नियम के तहत भाषा का ज्ञान परमिट और उसके नवीनीकरण से भी जोड़ा गया है।

सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य ड्राइवरों को मराठी का विशेषज्ञ बनाना नहीं, बल्कि यात्रियों से रोजमर्रा की बातचीत के लिए जरूरी भाषा ज्ञान देना है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी स्पष्ट किया है कि हिंदी भाषी ड्राइवरों को मराठी में विशेषज्ञ बनने की जरूरत नहीं है।

20 अगस्त से शुरू हुई सख्ती

सरकार की ओर से दी गई मोहलत के बाद 20 अगस्त से RTO ने जांच अभियान शुरू किया। अधिकारियों की टीम ऑटो, टैक्सी और ऐप कैब ड्राइवरों की मराठी समझने और बोलने की क्षमता की जांच कर रही है। यह अभियान 30 सितंबर तक चलने की जानकारी सामने आई है।

25 अगस्त तक की कार्रवाई में महाराष्ट्र के RTO ने 35,190 कमर्शियल पैसेंजर वाहनों की जांच की। इनमें मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन के 14,399 वाहन शामिल थे। राज्यभर में 4,729 नोटिस जारी किए गए, जिनमें 2,239 नोटिस MMR में दिए गए। अकेले 25 अगस्त की जांच में MMR में 1,392 ड्राइवरों की जांच हुई और 139 को नोटिस दिया गया।

ड्राइवरों की सबसे बड़ी शिकायत क्या है?

ड्राइवरों का कहना है कि वे मराठी सीखने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन RTO की जांच में पूछे जा रहे कुछ सवाल उस प्रशिक्षण से बाहर हैं जो उन्हें दिया गया था।

कई ड्राइवरों का दावा है कि सरकारी प्रशिक्षण में रोजमर्रा की बातचीत से जुड़े आसान वाक्य सिखाए गए थे, जबकि जांच के दौरान उनसे अपेक्षाकृत कठिन सवाल पूछे जा रहे हैं। उनका कहना है कि कम पढ़े-लिखे और उम्रदराज ड्राइवरों के लिए अचानक भाषा परीक्षा पास करना मुश्किल हो रहा है।

टेस्ट में किस तरह के सवाल पूछे जाते हैं?

आधिकारिक भाषा जांच का उद्देश्य रोजमर्रा की ड्राइविंग से जुड़ी बातचीत को परखना है। इसमें यात्रियों से गंतव्य, किराया, रास्ता, मीटर और CNG भरवाने जैसी परिस्थितियों में बातचीत करने की क्षमता शामिल है।

यानी नियम का उद्देश्य साहित्यिक या उच्च स्तर की मराठी जांचना नहीं, बल्कि ड्राइवर और यात्री के बीच सामान्य संवाद की क्षमता देखना बताया गया है।

ड्राइवरों ने क्यों की हड़ताल?

मुंबई में ड्राइवरों के एक वर्ग ने 24 अगस्त से तीन दिन की हड़ताल शुरू की। कांदिवली समेत कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन और सड़क जाम की स्थिति भी बनी। ड्राइवरों का कहना है कि भाषा नियम के कारण उनकी रोजी-रोटी पर असर पड़ सकता है। कुछ प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें परेशान किया जा रहा है।

कुछ ड्राइवरों का कहना है कि वे 55-60 वर्ष की उम्र में नई भाषा सीखने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनके लिए परीक्षा पास करना आसान नहीं है। उनका सवाल है कि अगर वे असफल होते हैं तो आर्थिक नुकसान कैसे उठाएंगे।

मुंबई में यात्रियों पर असर

हड़ताल और RTO की कार्रवाई के बीच मुंबई में ऑटो और टैक्सी की कमी महसूस की गई। कई यात्रियों ने 40-50 मिनट तक वाहन का इंतजार करने की बात कही। ऑफिस जाने वाले लोगों के साथ रेलवे स्टेशन और अन्य जरूरी स्थानों तक पहुंचने वाले यात्रियों को भी परेशानी हुई।

ऑटो और टैक्सी की कमी का असर ऐप आधारित कैब सेवाओं पर भी पड़ा, क्योंकि भाषा नियम इन ड्राइवरों पर भी लागू है। ऐसे में यात्रियों के पास वैकल्पिक परिवहन का दबाव बढ़ गया।

सरकार का क्या कहना है?

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विवाद के बीच कहा है कि सरकार हिंदी भाषी ड्राइवरों को मराठी का विशेषज्ञ बनाने की कोशिश नहीं कर रही है। उनका कहना है कि ड्राइवरों के लिए अपने काम से जुड़ी बातचीत करने लायक मराठी जानना पर्याप्त है।

फडणवीस ने यह भी कहा कि भाषा के आधार पर किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और जरूरत पड़ने पर भाषा सीखने के लिए अतिरिक्त समय देने पर भी विचार किया जा सकता है।

नियम को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती

विवाद अब कानूनी मोर्चे तक भी पहुंच गया है। चार ऐप आधारित कैब ड्राइवरों ने महाराष्ट्र सरकार के 12 अगस्त के नोटिफिकेशन को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी की है।

याचिका में दावा किया गया है कि नियम उनके मौलिक अधिकारों को प्रभावित करता है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि Motor Vehicles Act, 1988 में ड्राइविंग लाइसेंस रखने के लिए किसी विशेष भाषा की योग्यता निर्धारित नहीं है। उन्होंने नियम के कारण आर्थिक रूप से कमजोर और प्रवासी ड्राइवरों पर पड़ने वाले असर का भी मुद्दा उठाया है।

नियम न मानने पर क्या हो सकता है?

सरकार के संशोधित नियमों के मुताबिक मराठी का कामचलाऊ ज्ञान ड्राइवर के बैज और परमिट से जुड़ी शर्तों में शामिल किया गया है। नियम का पालन न होने पर लाइसेंसिंग अथॉरिटी ड्राइवर का बैज अधिकतम तीन महीने तक निलंबित कर सकती है और आगे उसे रद्द करने की कार्रवाई भी हो सकती है। परमिट जारी करने और उसके नवीनीकरण में भी भाषा ज्ञान को शर्त बनाया गया है।

हालांकि, ड्राइवरों के बीच जुर्माने को लेकर भी भ्रम की स्थिति रही है। एक RTO अधिकारी के मुताबिक कुछ ड्राइवरों में 5,000 से 20,000 रुपये तक जुर्माने की अफवाह फैल गई थी।

विवाद के बीच सबसे बड़ा सवाल

इस पूरे विवाद में दो पक्ष सामने हैं। सरकार का कहना है कि मुंबई जैसे शहर में यात्रियों और ड्राइवरों के बीच बेहतर संवाद के लिए स्थानीय भाषा का बुनियादी ज्ञान जरूरी है। दूसरी तरफ ड्राइवर संगठनों का तर्क है कि नियम लागू करने का तरीका उनके लिए परेशानी और आर्थिक असुरक्षा पैदा कर रहा है।

खासकर उम्रदराज, कम पढ़े-लिखे और दूसरे राज्यों से आकर वर्षों से मुंबई में काम कर रहे ड्राइवरों के लिए भाषा परीक्षा चुनौती बन गई है। अब सरकार के सामने चुनौती यह है कि स्थानीय भाषा को बढ़ावा देने के उद्देश्य और लाखों ड्राइवरों की रोजी-रोटी के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

आगे क्या?

फिलहाल RTO की जांच जारी है और सरकार का अभियान 30 सितंबर तक चलने की बात सामने आई है। वहीं, ड्राइवरों का विरोध और कानूनी चुनौती इस मामले को और महत्वपूर्ण बना रहे हैं। आने वाले दिनों में सरकार की ओर से नियमों के क्रियान्वयन को लेकर कोई और स्पष्टीकरण या राहत मिलती है या नहीं, इस पर नजर रहेगी।

मुंबई का मराठी भाषा विवाद अब केवल भाषा सीखने की शर्त तक सीमित नहीं रहा। यह मामला सार्वजनिक परिवहन, ड्राइवरों की आजीविका, प्रवासी कामगारों की चिंताओं और सरकारी नियमों के अधिकार क्षेत्र से जुड़ गया है। एक तरफ सरकार बुनियादी मराठी ज्ञान को जरूरी बता रही है, वहीं ड्राइवर इसे लागू करने के तरीके और संभावित आर्थिक नुकसान को लेकर विरोध कर रहे हैं। अब हड़ताल, RTO जांच और बॉम्बे हाईकोर्ट में प्रस्तावित चुनौती—तीनों पर आगे की स्थिति महत्वपूर्ण होगी।

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