
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को लेकर भारत ने एक बार फिर अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट कर दिया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा है कि हसीना के संभावित प्रत्यर्पण (Extradition) के मामले में भारत की नीति पहले जैसी ही है और इसमें किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है।
विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि शेख हसीना से जुड़ा प्रत्यर्पण का मामला पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के दायरे में आता है।
उन्होंने कहा कि भारत का रुख पहले से स्पष्ट है और इस मामले में कोई बदलाव नहीं हुआ है। प्रत्यर्पण से जुड़े सभी मामलों का निपटारा कानून और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार ही किया जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
बांग्लादेश में जुलाई-अगस्त 2024 के छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना देश छोड़कर भारत आ गई थीं। इसके बाद से उनकी वापसी को लेकर लगातार चर्चा होती रही है।
हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में शेख हसीना ने कहा कि वह दिसंबर के आसपास बांग्लादेश लौटकर अदालत में आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें भारत की किसी मदद की आवश्यकता नहीं है और वे स्वयं वापस लौटेंगी।
बांग्लादेश सरकार का क्या कहना है?
बांग्लादेश सरकार ने संकेत दिया है कि यदि शेख हसीना लौटती हैं तो उनका स्वागत किया जाएगा। हालांकि, सरकार की ओर से यह भी सलाह दी गई कि उन्हें अपने साथ एक सक्षम वकील लेकर आना चाहिए।
इसी बीच, बांग्लादेश की एक अदालत ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित हिंसा के आदेश देने के मामले में शेख हसीना को मौत की सजा सुनाई है।
भारत का रुख पहले भी यही रहा
भारत पहले भी बांग्लादेश की ओर से आई प्रत्यर्पण संबंधी मांगों पर यही कहता रहा है कि किसी भी प्रकार की कार्रवाई कानून और द्विपक्षीय प्रक्रियाओं के तहत ही की जाएगी। विदेश मंत्रालय के ताजा बयान से स्पष्ट है कि इस नीति में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
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