11 साल के लड़के की रेबीज से मौत: चेहरे पर बैठे चमगादड़ ने ली जान, डॉक्टरों ने जारी की चेतावनी

हेल्थ डेस्क | News Box Bharat
कनाडा से एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। 11 वर्षीय एक लड़के की रेबीज (Hydrophobia) से मौत हो गई, जबकि उसके शरीर पर चमगादड़ के काटने का कोई स्पष्ट निशान भी नहीं मिला था। इस घटना ने डॉक्टरों को लोगों को रेबीज के खतरे के प्रति फिर से सतर्क करने पर मजबूर कर दिया है।
क्या हुआ था?
रिपोर्ट के अनुसार, गर्मियों के दौरान उत्तरी ओंटारियो स्थित एक कॉटेज में लड़का सो रहा था। अचानक उसकी नींद खुली तो उसने देखा कि एक चमगादड़ उसके चेहरे, नाक और मुंह के पास बैठा हुआ है।
लड़के ने तुरंत चमगादड़ को हटा दिया और उसके पिता ने उसे पकड़कर बाहर छोड़ दिया। चूंकि शरीर पर न तो काटने का निशान था और न ही कोई खरोंच दिखाई दी, इसलिए परिवार ने इसे गंभीर नहीं माना और डॉक्टर से संपर्क नहीं किया।
लेकिन लगभग 17 दिन बाद लड़के में रेबीज के लक्षण दिखाई देने लगे। अस्पताल में भर्ती कराने के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
क्यों खतरनाक है चमगादड़?
विशेषज्ञों के अनुसार चमगादड़ों के दांत बेहद छोटे और पतले होते हैं। कई बार इनके काटने का निशान दिखाई भी नहीं देता। ऐसे में संक्रमित लार (Saliva) के संपर्क से भी रेबीज वायरस शरीर में प्रवेश कर सकता है।
एक बार रेबीज के लक्षण शुरू हो जाएं तो यह बीमारी लगभग हमेशा जानलेवा साबित होती है।
डॉक्टरों की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति का चमगादड़ से संपर्क हुआ हो, चाहे काटने का निशान दिखे या नहीं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
क्या करें?
- चमगादड़ या किसी संदिग्ध जानवर के संपर्क में आने पर तुरंत अस्पताल जाएं।
- प्रभावित स्थान को साबुन और पानी से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोएं।
- डॉक्टर की सलाह पर रेबीज वैक्सीन (PEP) और रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन लगवाएं।
- इलाज में देरी बिल्कुल न करें।
भारत में रेबीज की स्थिति
भारत में हर साल रेबीज से हजारों लोगों की मौत होती है, जिनमें ज्यादातर मामले कुत्तों के काटने से जुड़े होते हैं। हालांकि चमगादड़ से रेबीज के मामले कम सामने आते हैं, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार चमगादड़ के संपर्क को भी गंभीर माना जाता है और ऐसी स्थिति में तुरंत Post-Exposure Prophylaxis (PEP) शुरू करना जरूरी है।
बचाव के आसान उपाय
- पालतू कुत्तों और बिल्लियों का समय-समय पर टीकाकरण कराएं।
- चमगादड़ या अन्य जंगली जानवरों को हाथ लगाने से बचें।
- घर की खिड़कियों और वेंटिलेशन पर जाली लगाएं।
- बच्चों को जंगली जानवरों से दूर रहने की सलाह दें।
- किसी भी जानवर के काटने या संदिग्ध संपर्क को हल्के में न लें।
यह घटना बताती है कि कभी-कभी बिना दिखाई देने वाले घाव भी जानलेवा संक्रमण का कारण बन सकते हैं। यदि आपका या आपके किसी परिचित का चमगादड़ या किसी जंगली जानवर से संपर्क हुआ है, तो बिना देर किए नजदीकी अस्पताल जाकर डॉक्टर से सलाह लें।
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