राजस्थान में इस्लामपुर का नाम बदलने की सिफारिश पर विवाद, श्रीरामपुर नाम प्रस्ताव के खिलाफ ग्रामीणों का प्रदर्शन

झुंझुनू, राजस्थान: राजस्थान के झुंझुनू जिले के करीब 400 साल पुराने इस्लामपुर गांव का नाम बदलकर “श्रीरामपुर” करने की सिफारिश को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए इसे गांव की ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत से छेड़छाड़ बताया है। मामले ने अब राजनीतिक रूप भी ले लिया है।

इस्लामपुर क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, झुंझुनू विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक राजेंद्र भांबू ने फरवरी 2026 में जिला प्रशासन को पत्र लिखकर इस्लामपुर गांव का नाम बदलकर श्रीरामपुर करने की सिफारिश की थी। उनका कहना था कि यह क्षेत्र की जनभावनाओं और स्थानीय प्रतिनिधियों की मांग के अनुरूप है।
इसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने इस प्रस्ताव पर जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी, जिसके बाद नाम परिवर्तन की प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक स्तर पर गतिविधियां शुरू हुईं।
नाम बदलने के प्रस्ताव के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध
गांव में नाम परिवर्तन की चर्चा शुरू होते ही स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने इस्लामपुर से झुंझुनू कलेक्ट्रेट तक पदयात्रा निकाली और प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर प्रस्ताव वापस लेने की मांग की।
विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस्लामपुर गांव की पहचान कई पीढ़ियों से इसी नाम से जुड़ी हुई है और बिना स्थानीय सहमति के इसे बदलना उचित नहीं होगा।
इस्लामपुर 400 साल पुरानी पहचान का हवाला
ग्रामीणों का दावा है कि इस्लामपुर गांव लगभग चार शताब्दियों पुराना है। यहां विभिन्न समुदायों के लोग लंबे समय से आपसी सौहार्द के साथ रहते आए हैं। उनका कहना है कि गांव का नाम बदलना केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं बल्कि ऐतिहासिक और सामाजिक पहचान से जुड़ा विषय है।
स्थानीय लोगों के अनुसार गांव का नाम कई सरकारी रिकॉर्ड, शैक्षणिक दस्तावेजों और अन्य अभिलेखों में दर्ज है। ऐसे में नाम परिवर्तन से प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर भी कई चुनौतियां सामने आ सकती हैं।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
भाजपा विधायक राजेंद्र भांबू ने नाम परिवर्तन को जनता की मांग बताया है। वहीं विपक्षी नेताओं और कई स्थानीय संगठनों ने इस कदम पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि इस मुद्दे को राजनीतिक और सांप्रदायिक रंग दिया जा रहा है।
विरोध प्रदर्शन में शामिल नेताओं ने कहा कि किसी भी ऐतिहासिक स्थान का नाम बदलने से पहले स्थानीय निवासियों की राय लेना जरूरी है।
अभी क्या है स्थिति?
23 जून 2026 तक प्रशासन इस मामले में रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया में जुटा हुआ है। दूसरी ओर ग्रामीणों का विरोध जारी है और वे नाम परिवर्तन के प्रस्ताव को पूरी तरह वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल यह मामला केवल गांव के नाम बदलने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पहचान, इतिहास, जनभावनाओं और राजनीति से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में प्रशासन की रिपोर्ट और राज्य सरकार के रुख पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
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