+91 6205-216-893 info@newsboxbharat.com
Thursday, April 3, 2025
Latest Hindi NewsNews

लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पेश

national news | national latest news | national latest hindi news | national news box bharat
Share the post
national news | national latest news | national latest hindi news | national news box bharat

कांग्रेस ने बिल का विरोध किया

रांची। संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजु ने लोकसभा में वक्फ संशोधन 2025 बिल पेश कर दिया गया है। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने बिल पेश होने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इस बिल में संशोधन मेंबर्स से भी लिए जाने चाहिए थे। उनसे पूछा जाना था। संशोधन के लिए वक्त दिया जाना चाहिए था। वक्त मिला ही नहीं। इस सदन में कभी ऐसा कभी हुआ। इस पर स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि मैंने जितना समय गैर-सरकारी संशोधनों को दिया है, उतना ही गैर सरकारी संशोधनों को दिया। दोनों में कोई अंतर नहीं किया गया।

बिल पेश होने के बाद चर्चा…

विपक्ष ही कह रहा था कि जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी बने

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि एक बिल कैबिनेट ने अप्रूव करके रखा। यह बिल जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी को दिया गया। विपक्ष भी इस पर बोल रहा था। कमेटी के सुझावों को कैबिनेट ने स्वीकार किए। संशोधन के रूप में किरेन रिजिजू लेकर आए। विपक्ष ही कह रहा था कि जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी बने। ये कांग्रेस जैसी पार्लियामेंट्री कमेटी नहीं है। हमारी कमेटी है, जो चर्चा करती है।

पहले भी ऐसा हो चुका है

स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि JPC के किसी भी विधेयक में संशोधन की शक्तियां व्यापक हैं। समिति किसी भी विधेयक में संशोधन कर सकती है या पूरी तरह प्रारूप बदल सकती है। पूरा नाम और संक्षिप्त नाम भी बदल सकती है। पहले भी ऐसा हो चुका है।

इतिहास में इतनी व्यापक चर्चा नहीं हुई

संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि हम सबको बहुत डिटेल में जाने की कमेटी के बारे में कोई आवश्यकता नहीं है। इस बार कमेटी राज्यसभा और लोकसभा सांसदों को मिलाकर बनी है। आज तक संसदीय इतिहास में इतनी व्यापक चर्चा नहीं हुई और समय इतना कभी नहीं दिया गया। 97 लाख 27 हजार के करीब याचिकाएं आईं। ये सुझाव, एप्लीकेशन और मेमोरेंडम के रूप में थीं। कभी भी इससे ज्यादा संख्या में किसी बिल पर लोगों की याचिकाएं नहीं आईं। 284 डेलीगेशन ने कमेटी के सामने अपनी बात रखी और सुझाव दिए।

1954 में वक्फ एक्ट पहली बार बना

किरेन रिजिजू ने कहा कि कई लीगल एक्सपर्ट, कम्युनिटी लीडर्स, धार्मिक लीडर्स और अन्य लोगों ने कमेटी के सामने अपने सुझाव रखे। आजादी से पहले पहली बार बिल पास किया गया था। इससे पहले वक्फ को इनवैलिडेट (अवैध करार) किया था। 1923 में मुसलमान वक्फ एक्ट लाया गया था। ट्रांसपेरेंसी और एकाउंटिबिलिटी का आधार देते हुए एक्ट पारित किया गया था। आजादी के बाद 1954 में वक्फ एक्ट पहली बार बना। उस समय स्टेट वक्फ बोर्ड का भी प्रावधान किया गया था। उस वक्त से कई संशोधनों के बाद 1995 में वक्फ एक्ट बना। उस वक्त किसी ने नहीं कहा कि ये गैरसंवैधानिक है। आज जब हम उसी बिल को सुधारकर ला रहे हैं तो आप कह रहे हैं कि यह गैरसंवैधानिक है। आप सबकुछ छोड़कर जिसका लेना-देना नहीं है, उसका जिक्र कर आप लोगों को बरगला रहे हैं। अगर वक्फ का निर्णय किसी को स्वीकार नहीं तो ट्रिब्यूनल जा सकते हैं। 5 लाख से ज्यादा प्रॉपर्टी के लिए एक अफसर नियुक्त किया जाएगा।

मस्जिद के मैनेजमेंट में दखलंदाजी का प्रावधान नहीं

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री रिजिजू ने कहा कि किसी भी तरीके से वक्फ बोर्ड वक्फ प्रॉपर्टी को मैनेज नहीं करता। संविधान कहता है कि न तो सरकार किसी भी धार्मिक व्यवस्था में दखलंदाजी कर सकती है, न ही वक्फ किसी भी धार्मिक व्यवस्था में हाथ डाल सकता है। ये लोग संविधान को ही नहीं मानते। हम किसी भी मस्जिद के मैनेजमेंट में दखलंदाजी का प्रावधान नहीं कर रहे हैं। वक्फ बोर्ड का प्रावधान किसी मस्जिद-मंदिर की धार्मिक व्यवस्था से लेना-देना नहीं है, सिर्फ प्रॉपर्टी के मैनेजमेंट का मसला है।

8.72 लाख वक्फ प्रॉपर्टी है

किरेन रिजिजू ने कहा कि देश में इतनी वक्फ प्रॉपर्टी है तो इसे बेकार में पड़ा नहीं रहने देंगे। गरीब मुसलमानों और बाकी मुसलमानों के लिए इसका इस्तेमाल किया ही जाना चाहिए। हमने रिकॉर्ड देखा है। सच्चर कमेटी ने भी इसका डिटेल में जिक्र किया है। 2006 में 4.9 लाख वक्फ प्रॉपर्टी थी। इनकी टोटल इनकम 163 करोड़ इनकम थी। 2013 में बदलाव करने के बाद जो इनकम बढ़कर 166 करोड़ हुई। 10 साल के बाद भी 3 करोड़ बढ़ी थी। हम इसे मंजूर नहीं कर सकते। रिजिजू ने कहा कि 8.72 लाख वक्फ प्रॉपर्टी इस वक्त देश में है। इसका अगर हम सही से इस्तेमाल करें तो मुसलमान ही नहीं, देश की तकदीर बदल जाएगी।

आदिवासी इलाके में वक्फ प्रॉपर्टी क्रिएट नहीं कर सकेंगे

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री ने कहा कि कलेक्टर से ऊपर कोई भी अधिकारी सरकारी जमीन और किसी विवादित जमीन का विवाद देखेगा। जब वक्फ प्रॉपर्टी क्रिएट करेंगे तो किसी आदिवासी एरिया में जाकर नहीं कर सकते। यह बदलाव अहम है। वक्फ ट्रिब्यूनल में 3 मेंबर होंगे। इसके केस जल्द खत्म किए जाएं। इनका कार्यकाल होगा। अगर वक्फ के ट्रिब्यूनल के फैसले से खुश नहीं हैं तो अदालत जा सकते हैं। वक्फ बोर्ड जो कॉन्ट्रीब्यूशन देते हैं तो मुतावली पहले 7 फीसदी देते थे, अब उसे 5 फीसदी कर दिया गया है।

सड़क पर नमाज नहीं पढ़ने दी

बिल पर चर्चा करते हुए कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि इन्होंने (किरेन रिजिजु) 2013 में यूपीए सरकार के विषय में कहा, वह पूरा का पूरा मिसलीड है, झूठ है। इन्होंने आरोप लगाए, भ्रम फैलाया। संविधान कहता है कि सभी को सामाजिक, धार्मिक और रातनीतिक न्याय और समानता मिले। बिल संविधान के मूल ढांचे पर आक्रमण है। मंत्रीजी का पूरा भाषण संघीय ढांचे पर आक्रमण है। इस सरकार का इस बिल के द्वारा 4 मकसद हैं। संविधान को कमजोर करना, भ्रम फैलाना और अल्पसंख्यकों को बदनाम करना, भारतीय समाज को बांटना और चौथा मकसद अल्पसंख्यकों को डिसएन्फ्रेंचाइज करना। कुछ हफ्ते पहले देश में लोगों ने ईद की शुभकामनाएं दीं। इनकी डबल इंजन सरकार ने लोगों को सड़क पर नमाज नहीं पढ़ने दी। बात करते हैं आपसी भाईचारे की।

राज्य सरकार की पावर खत्म करने की कोशिश

गौरव गोगोई ने कहा कि अल्पसंख्यकों की जमीन पर इनकी नजर जाएगी। संशोधन ऐसा होना चाहिए कि बिल ताकतवर बने। इनके संशोधनों से समस्याएं और विवाद बढ़ेंगे। राज्य सरकार की पावर खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। नियम बनाने की ताकत राज्य सरकार को है। राज्य सरकार सर्वे कमिश्नर के पक्ष में नियम बना सकती है। आप सब हटाना चाहते हैं और कह रहे हैं कि ये संशोधन हैं। आप कह रहे हैं कि ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद हाईकोर्ट के कोई मायने नहीं है। पहले ही कहा गया है कि हाईकोर्ट किसी भी फैसले पर विचार कर सकता है और उसे बदल सकता है। 5 साल तक इस्लाम मानने वाला ही वक्फ क्रिएट करता है। पहले था कि कोई भी व्यक्ति वक्फ बना सकता है, यही तो हमारा सेक्युलर ढांचा है।

पक्ष सिर्फ भ्रम फैला रहा है

2 महिलाएं वक्फ बोर्ड में होनी चाहिए। यह पहले भी था। 2 से ज्यादा महिलाएं भी हो सकती थीं। विधवा, तलाकशुदा का जिक्र किया, ये पहले भी था। इन्हें भ्रम फैलाना है कि वर्तमान एक्ट महिलाओं के खिलाफ है। वक्फ कानून में पहले से ही यह कानून है। पहले 7% रेवेन्यू था और आज इन्होंने 5% कर दिया। क्या आप नहीं चाहते कि वक्फ बोर्ड सही तरह से चले। उसका आधुनिकीकरण हो। आप चाहते हैं वक्फ बोर्ड और ट्रब्यूनल और कमजोर हो। इसलिए वक्फ के रेवेन्यू का प्रतिशत घटा दिया। हमारा सुझाव है कि इस रेवेन्यू को बढ़ाकर 11% कर दीजिए। गोगोई ने कहा कि ये (सरकार) JPC की बात करते हैं कि विस्तार से चर्चा हुई। उसमें ऐसे लोग भी आए थे, जिन्हें वक्फ की जानकारी भी नहीं थी। हमने पत्र लिखकर इसके बारे में बताया था।

क्या ये दूसरे धर्मों से सर्टिफिकेट मांगेंगे

गौरव गोगोई बोले कि पहले भी मंत्री जी ने कहा था कि बिल लाने से पहले विस्तार से चर्चा हुई है। यह गुमराह करने वाला बयान है। सरकार को जो 5 मीटिंग हुई हैं, उसका ब्योरा दें। एक भी मीटिंग में इस बात का जिक्र भी नहीं हुआ कि नया वक्फ बिल चाहिए। सिर्फ पोर्टल को लेकर विचार हुआ। एक भी मीटिंग में नया वक्फ बिल चाहिए, इसका जिक्र तक नहीं हुआ। 2023 तक मिनिस्ट्री ने नए बिल पर विचार ही नहीं किया तो ये बिल कहां से आया। ये बात करते हैं कि संविधान के पक्ष में हैं। मैं कहना चाहता हूं कि बिल कहता है कि कोई भी व्यक्ति इस्लाम मानने वाला हो। वो दिखाता हो और उसकी प्रैक्टिस (धर्म का पालन) करता हो, वह वक्फ क्रिएट कर सकता है। क्या ये दूसरे धर्मों से सर्टिफिकेट मांगेंगे। ये क्यों धर्म को खींच रहे हैं कि आप इस धर्म को मानते हो, उसका सबूत दो।

Leave a Response