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Monday, October 26, 2026
नंदन नीलकणि की प्रोफाइल फोटो, Infosys के सह-संस्थापक और NTA परीक्षा सुधार टास्क फोर्स के चेयरमैन
NTA परीक्षा सुधार टास्क फोर्स के चेयरमैन और Infosys के सह-संस्थापक नंदन नीलकणि।
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Nandan Nilekani कौन हैं? NTA परीक्षा सुधार टास्क फोर्स के चेयरमैन की पूरी प्रोफाइल

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नंदन नीलकणि (Nandan Mohanrao Nilekani) भारत के सबसे प्रतिष्ठित उद्यमियों, टेक्नोलॉजी लीडर्स और पब्लिक पॉलिसी विशेषज्ञों में गिने जाते हैं। वे आईटी कंपनी Infosys के सह-संस्थापक, Aadhaar परियोजना के प्रमुख आर्किटेक्ट और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के मजबूत समर्थक रहे हैं। जुलाई 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें National Testing Agency (NTA) की परीक्षाओं में व्यापक सुधार के लिए गठित हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का चेयरमैन नियुक्त किया है।

नंदन नीलकणि का प्रारंभिक जीवन

नंदन नीलकणि का जन्म 2 जून 1955 को कर्नाटक के बेंगलुरु में हुआ। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा Bishop Cotton Boys’ School और St. Joseph’s High School, धारवाड़ से पूरी की। इसके बाद उन्होंने IIT Bombay से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक. की डिग्री हासिल की।

उनकी पत्नी रोहिणी नीलकणि प्रसिद्ध समाजसेवी और Arghyam Foundation की चेयरपर्सन हैं। दोनों की शादी वर्ष 1981 में हुई थी और उनके दो बच्चे हैं।

Infosys की स्थापना और वैश्विक पहचान

साल 1981 में नंदन नीलकणि ने एन.आर. नारायण मूर्ति और अन्य साथियों के साथ मिलकर Infosys की स्थापना की। कंपनी ने छोटे स्तर से शुरुआत की, लेकिन धीरे-धीरे यह दुनिया की अग्रणी आईटी कंपनियों में शामिल हो गई।

2002 से 2007 तक CEO के रूप में नीलकणि ने कंपनी का नेतृत्व किया। उनके कार्यकाल में Infosys का कारोबार कई गुना बढ़ा और कंपनी ने वैश्विक स्तर पर भारतीय आईटी उद्योग की पहचान मजबूत की। वर्ष 2017 में वे Infosys के Non-Executive Chairman बने।

Aadhaar परियोजना के प्रमुख आर्किटेक्ट

साल 2009 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के आमंत्रण पर नंदन नीलकणि ने Infosys छोड़कर Unique Identification Authority of India (UIDAI) के संस्थापक अध्यक्ष का दायित्व संभाला।

उनके नेतृत्व में Aadhaar परियोजना विकसित हुई, जो आज दुनिया का सबसे बड़ा बायोमेट्रिक पहचान कार्यक्रम है। 1.4 अरब से अधिक भारतीयों को इससे जोड़ा जा चुका है। प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT), बैंकिंग सेवाएं, UPI और डिजिटल गवर्नेंस में Aadhaar की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

डिजिटल इंडिया में अहम योगदान

नंदन नीलकणि ने भारत के Digital Public Infrastructure (DPI) मॉडल को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। UPI, डिजिटल पहचान और डेटा आधारित सार्वजनिक सेवाओं को मजबूत बनाने में उनका योगदान उल्लेखनीय माना जाता है।

उन्होंने EkStep Foundation की सह-स्थापना भी की, जो शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल समाधान विकसित करने का कार्य करती है।

राजनीति में भी आजमाई किस्मत

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में नंदन नीलकणि ने कांग्रेस के टिकट पर बेंगलुरु साउथ सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली और फिर से टेक्नोलॉजी एवं सार्वजनिक नीति के क्षेत्र में काम करना शुरू किया।

NTA परीक्षा सुधार टास्क फोर्स की जिम्मेदारी

NEET समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और पारदर्शिता पर उठे सवालों के बाद केंद्र सरकार ने वर्ष 2026 में नंदन नीलकणि की अध्यक्षता में हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का गठन किया।

इस समिति का उद्देश्य NTA परीक्षाओं को पूरी तरह टेक्नोलॉजी आधारित, पारदर्शी, सुरक्षित और लीक-प्रूफ बनाना है। टास्क फोर्स में पूर्व ISRO प्रमुख एस. सोमनाथ, पूर्व IB निदेशक तपन डेका, IIT मद्रास के निदेशक वी. कामकोटी सहित कई विशेषज्ञ शामिल हैं।

पुरस्कार और सम्मान

नंदन नीलकणि को उनके योगदान के लिए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं।

  • पद्म भूषण (2006)
  • Time Magazine की 100 सबसे प्रभावशाली हस्तियों में शामिल
  • Forbes Asia Businessman of the Year
  • Joseph Schumpeter Prize
  • Nikkei Asia Prize
  • EY Lifetime Achievement Award

नेट वर्थ और समाजसेवा

नंदन नीलकणि की अनुमानित कुल संपत्ति लगभग 2.4 से 3.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर आंकी जाती है, जिसका अधिकांश हिस्सा Infosys में उनकी हिस्सेदारी से जुड़ा है।

उन्होंने IIT Bombay को ₹400 करोड़ से अधिक का दान दिया है, जिसमें वर्ष 2023 में दिया गया ₹315 करोड़ का योगदान भी शामिल है। पत्नी रोहिणी नीलकणि के साथ उन्होंने Giving Pledge पर हस्ताक्षर किए हैं और शिक्षा, जल संरक्षण, शहरी विकास तथा सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में लगातार काम कर रहे हैं।

क्यों खास हैं नंदन नीलकणि?

भारत में डिजिटल पहचान, ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था, डिजिटल गवर्नेंस और अब परीक्षा प्रणाली में तकनीकी सुधार जैसे बड़े बदलावों के पीछे नंदन नीलकणि की सोच और नेतृत्व को महत्वपूर्ण माना जाता है। Infosys के जरिए भारतीय आईटी उद्योग को वैश्विक पहचान दिलाने से लेकर Aadhaar जैसी ऐतिहासिक परियोजना को सफल बनाने तक उनका योगदान देश की डिजिटल क्रांति का अहम हिस्सा रहा है।

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