George Kurian Resignation: मोदी सरकार के मंत्री जॉर्ज कुरियन ने दिया इस्तीफा, राष्ट्रपति ने मंजूर किया त्यागपत्र

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री की सलाह पर उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। यह घटनाक्रम राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है और इसे संभावित कैबिनेट फेरबदल से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
जॉर्ज कुरियन ने क्यों दिया इस्तीफा?
जॉर्ज कुरियन का राज्यसभा कार्यकाल 21 जून 2026 को समाप्त हो गया था। हाल ही में हुए राज्यसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उन्हें दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया। संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार मंत्री पद पर बने रहने के लिए संसद का सदस्य होना आवश्यक होता है। ऐसे में उन्होंने अपने मंत्री पद से इस्तीफा सौंप दिया।
राष्ट्रपति भवन ने क्या कहा?
राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी बयान में कहा गया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
कौन हैं जॉर्ज कुरियन?
जॉर्ज कुरियन का जन्म 20 सितंबर 1960 को केरल के कोट्टायम में हुआ था। वे पेशे से सुप्रीम कोर्ट के वकील हैं और लंबे समय से भाजपा से जुड़े हुए हैं। वर्ष 1980 से पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता रहे कुरियन राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं।
मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में उन्हें अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय तथा मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वे केंद्र सरकार में ईसाई समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख चेहरों में से एक माने जाते थे।
राजनीतिक मायने क्या हैं?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह इस्तीफा तकनीकी और संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा है, क्योंकि राज्यसभा सदस्यता समाप्त होने के बाद मंत्री पद पर बने रहना संभव नहीं होता। हालांकि कुछ राजनीतिक हलकों में इसे संभावित कैबिनेट विस्तार या फेरबदल की तैयारी के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का राज्यसभा कार्यकाल भी समाप्त हो चुका है, लेकिन वे अभी मंत्री पद पर बने हुए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल को लेकर नई चर्चाएं तेज हो सकती हैं।
फिलहाल जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे को सामान्य संवैधानिक प्रक्रिया माना जा रहा है। हालांकि भाजपा नेतृत्व की ओर से आगे क्या फैसला लिया जाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
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