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Wednesday, February 11, 2026
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उन्नाव रेप केस: कुलदीप सिंह सेंगर को मिली जमानत पर विरोध तेज, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

Unnao Rape Case,Kuldeep Singh Sengar Bail
उन्नाव रेप केस: कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर जोरदार प्रदर्शन, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
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कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर जोरदार प्रदर्शन

उन्नाव रेप केस में सजायाफ्ता पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से मिली जमानत और सजा निलंबन के फैसले के खिलाफ शुक्रवार को राजधानी में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन हुआ। जनवादी महिला समिति के बैनर तले दर्जनों महिलाओं ने दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर प्रदर्शन करते हुए “वी वांट जस्टिस” और “फांसी दो” जैसे नारे लगाए।

प्रदर्शन के दौरान उन्नाव रेप पीड़िता भी मौजूद रहीं, हालांकि सुरक्षा कारणों से वे बस के भीतर ही रहीं और बाहर नहीं आईं। पीड़िता ने हाईकोर्ट के फैसले पर गहरी नाराज़गी और निराशा जताई।

“हम चुप नहीं बैठेंगे” — पीड़िता

पीड़िता ने कहा,

“जज साहब आए और खड़े-खड़े ही फैसला सुना दिया। हम इस मामले में चुप नहीं बैठेंगे।”

उन्होंने कुलदीप सिंह सेंगर की राजनीतिक और सामाजिक पहुंच का हवाला देते हुए अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई। पीड़िता ने यह भी कहा कि वे किसी कांग्रेस शासित राज्य में पुनर्वास की मांग कर रही हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि “कुलदीप सेंगर कहीं भी पहुंच सकता है।”

हाईकोर्ट का फैसला क्या है?

दिल्ली हाईकोर्ट ने 23 दिसंबर 2025 को कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा को अपील लंबित रहने तक निलंबित कर दिया और सशर्त जमानत दे दी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सेंगर ने अब तक 7 साल 5 महीने जेल में बिताए हैं, जो कुछ धाराओं के तहत अधिकतम सजा से अधिक है।

जमानत की शर्तें

  • ₹15 लाख का निजी मुचलका
  • पीड़िता के घर से कम से कम 5 किलोमीटर दूर रहना
  • दिल्ली में ही निवास करना
  • पासपोर्ट सरेंडर करना
  • हर सप्ताह पुलिस के सामने रिपोर्ट करना

हालांकि, सेंगर फिलहाल जेल में ही हैं, क्योंकि पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में उन्हें 10 साल की सजा मिली हुई है और उस केस में उन्हें जमानत नहीं मिली है।

फैसले के खिलाफ बढ़ता विरोध

26 दिसंबर को दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर प्रदर्शन से पहले पीड़िता और उनकी मां ने इंडिया गेट पर भी विरोध किया था, जहां पुलिस ने उन्हें हटा दिया था।
इस बीच सीबीआई ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को “कानून के विपरीत और विकृत” बताते हुए 26 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल की है।

इसके अलावा, दो वकीलों — अंजले पटेल और पूजा शिल्पकार — ने भी सुप्रीम कोर्ट में अलग याचिका दायर की है।
पीड़िता और उनका परिवार भी सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं। पीड़िता के वकील मेहमूद प्राचा ने कहा कि वे मजबूत कानूनी आधार के साथ इस फैसले को चुनौती देंगे।

उन्नाव रेप केस की पृष्ठभूमि

2017 में सामने आए उन्नाव रेप केस ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। मामले में नाबालिग पीड़िता के साथ गैंगरेप का आरोप लगा था।
2019 में कुलदीप सिंह सेंगर को इस मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

मामले के दौरान पीड़िता और उसके परिवार को लगातार धमकियों और हमलों का सामना करना पड़ा।

  • पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में मौत हो गई
  • एक सड़क हादसे में पीड़िता गंभीर रूप से घायल हुईं

न्याय व्यवस्था पर उठे सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद एक बार फिर महिलाओं की सुरक्षा, पीड़ितों के अधिकार और न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
अब पूरा देश इस बात पर नजर बनाए हुए है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या रुख अपनाता है

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