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Sunday, August 24, 2025
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बिहार में डायन के शक में नरसंहार: झारखंड कांग्रेस ने बंधु तिर्की के नेतृत्व में एक 5 सदस्यीय जांच दल पूर्णिया भेजा

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पूर्णिया में दिल दहलाने वाला कांड : तांत्रिक के उकसावे पर भीड़ ने जला डाला आदिवासी परिवार। 5 की निर्मम हत्या, तालाब में फेंके शव

Murder : बिहार के पूर्णिया जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के रजीगंज पंचायत के टेटगामा गांव में 6-7 जुलाई 2025 की रात एक दिल दहला देने वाली घटना हुई, जिसमें अंधविश्वास के चलते एक ही आदिवासी परिवार के पांच लोगों—बाबूलाल उरांव (40), उनकी पत्नी सीता देवी (35), मां कातो मसोमात (65), बेटा मंजीत उरांव (25), और बहू रानी देवी (23)—को डायन-बिसाही के आरोप में पहले पीट-पीटकर और फिर जिंदा जलाकर मार दिया गया। शवों को बोरी में भरकर तालाब में जलकुंभी के नीचे छिपाया गया था। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी। वहीं, झारखंड के सीएम हेमंत सोेरन ने अपने सोशल मीडिया X पर बिहार के सीएम से दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग की हैं। झारखंड कांग्रेस ने पूर्व मंत्री बंधु तिर्की के नेतृत्व में एक दल बिहार के पूर्णिया भेजा है।

घटना का कारण : गांव के रामदेव उरांव के एक बेटे की तीन दिन पहले बीमारी से मृत्यु हो गई थी, और उनका दूसरा बेटा भी बीमार था। ग्रामीणों ने इसकी वजह बाबूलाल उरांव के परिवार, खासकर सीता देवी और कातो देवी को डायन होने का आरोप लगाया। एक तांत्रिक, नकुल उरांव, ने पंचायत में इन महिलाओं को डायन बताकर भीड़ को उकसाया।

घटना का तरीका: रविवार रात करीब 10 बजे से 3 बजे के बीच, लगभग 50-250 ग्रामीणों की भीड़ ने बाबूलाल के घर पर हमला किया। परिवार के सदस्यों को घर से खींचकर तालाब के पास ले जाया गया, जहां उन्हें लाठी-डंडों से पीटा गया और फिर पेट्रोल या डीजल छिड़ककर जिंदा जला दिया गया। शवों को बोरी में भरकर तालाब में फेंक दिया गया।

चश्मदीद: परिवार का 15-16 वर्षीय बेटा सोनू कुमार इस नरसंहार में बाल-बाल बच गया। उसने रात के अंधेरे में 4 किलोमीटर भागकर अपने ननिहाल (वीरपुर) में जाकर घटना की जानकारी दी। सोनू ने बताया कि उसने अपनी आंखों से अपने परिवार को पीटे और जलाए जाते देखा।

पुलिस कार्रवाई: सोमवार सुबह 5 बजे सोनू की सूचना पर पुलिस सक्रिय हुई। डॉग स्क्वाड और फॉरेंसिक टीम की मदद से शवों को तालाब से बरामद किया गया, जो 80% तक जल चुके थे। पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें तांत्रिक नकुल उरांव भी शामिल है, जिस पर भीड़ को उकसाने का आरोप है। इसके अलावा, 23 नामजद और 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है, और छापेमारी जारी है। पूर्णिया के एसपी स्वीटी सहरावत और एसडीपीओ पंकज शर्मा ने घटना की पुष्टि की है।[

मानवता पर कलंक: झारखंड कांग्रेस ने बंधु तिर्की के नेतृत्व में एक पांच सदस्यीय जांच दल पूर्णिया भेजा है, जो इस बर्बर हत्या के कारणों की जांच करेगा और अपनी रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को सौंपेगा। बंधु तिर्की ने इसे मानवता पर कलंक बताया। टीम में अमुल्य निरज खलखो, जोसाइ माडी, राज उरांव व सोमनाथ मुंडा शामिल हैं।

तेजस्वी यादव: राजद नेता तेजस्वी यादव ने इस घटना को लेकर नीतीश सरकार पर निशाना साधा, इसे बिहार में कानून-व्यवस्था की बदहाली का सबूत बताया। उन्होंने इसे “DK टैक्स” की संज्ञा दी, जिससे बिहार में अराजकता चरम पर होने का दावा किया।

सामाजिक प्रतिक्रिया: यह घटना आदिवासी क्षेत्रों में अंधविश्वास की गहरी जड़ों और शिक्षा की कमी को उजागर करती है। गांव में शिक्षा और रोजगार की कमी के कारण लोग अंधविश्वास में विश्वास करते हैं, और तांत्रिकों की बात को अंतिम सत्य मान लेते हैं।

अंधविश्वास का प्रभाव: बिहार और झारखंड में डायन-बिसाही के नाम पर हत्याएं कोई नई बात नहीं हैं। झारखंड में पिछले 20 वर्षों में 1800 से अधिक लोग इस तरह की घटनाओं में मारे गए हैं, जिनमें 70% से अधिक महिलाएं थीं।

कानूनी प्रावधान: बिहार में जादू-टोना अधिनियम और झारखंड में डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम के तहत ऐसी हत्याएं भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 के तहत दंडनीय हैं, जिसमें आजीवन कारावास या मृत्युदंड का प्रावधान है।

शिक्षा की कमी: टेटगामा गांव में 40 परिवार रहते हैं, जिनमें अधिकतर आदिवासी हैं। शिक्षा और रोजगार की कमी के कारण अंधविश्वास पनपता है।यह घटना न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि समाज में अंधविश्वास, अशिक्षा, और सामाजिक असमानता की गंभीर समस्या को दर्शाती है। पुलिस और प्रशासन की ओर से सख्त कार्रवाई और जागरूकता अभियानों की जरूरत है ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

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