दावोस में गूंजी झारखंड की आवाज: कल्पना ने महिला सशक्तिकरण का ‘झारखंड मॉडल’ दुनिया के सामने रखा

दावोस/रांची। स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच (WEF) की बैठक के दौरान, झारखंड सरकार और ब्रिक्स चैंबर ऑफ कॉमर्स (BRICS CCI) ने मिलकर एक खास चर्चा आयोजित की। इसका विषय था—”महिला उद्यमिता: विकास को गति देना और एक स्थायी अर्थव्यवस्था बनाना।” इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता झारखंड विधानसभा की सदस्य और महिला एवं बाल विकास समिति की अध्यक्ष कल्पना मुर्मू सोरेन थीं। उनके संबोधन की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
1. आदिवासी संस्कृति और विकास का मेल
सोरेन ने कहा कि झारखंड का विकास मॉडल यहां की आदिवासी परंपराओं पर टिका है। हम ‘जल, जंगल और जमीन’ का केवल इस्तेमाल नहीं करते, बल्कि उनकी रक्षा करना अपनी जिम्मेदारी समझते हैं।
2. ‘अदृश्य मेहनत’ को पहचान
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गाँव और आदिवासी समाज की महिलाएँ सालों से परिवार और अर्थव्यवस्था को संभाल रही हैं, लेकिन उनके इस काम को अक्सर पहचान नहीं मिलती। अब समय आ गया है कि उनके इस ‘अदृश्य’ श्रम को समाज और अर्थव्यवस्था की असली बुनियाद माना जाए।
3. केवल मदद नहीं, सम्मान जरूरी
झारखंड सरकार का लक्ष्य सिर्फ योजनाएँ चलाना नहीं है, बल्कि महिलाओं के आत्मसम्मान और अवसरों को बढ़ाना है। सरकार ऐसी नीतियां बना रही है जिससे घर संभालने वाली महिलाओं और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ सके।
4. स्वयं सहायता समूहों (SHG) की ताकत
उन्होंने बताया कि JSLPS (झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी) के माध्यम से महिलाएँ अब आत्मनिर्भर बन रही हैं। ये समूह स्थानीय सामान बनाने और खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing) जैसे कामों के जरिए नेतृत्व करना सीख रहे हैं।
5. लोग पहले, संसाधन बाद में
श्रीमती सोरेन के अनुसार, मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सरकार का मानना है कि ‘पैसा और संसाधन’ से ज्यादा जरूरी ‘इंसान और उनके जीवन की गुणवत्ता’ है। जब महिलाएँ शारीरिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से मजबूत होंगी, तभी देश का सही विकास होगा।
निष्कर्ष: अंत में उन्होंने दुनिया भर के निवेशकों और संस्थाओं को झारखंड आने का न्योता दिया, ताकि वे महिलाओं के नेतृत्व में हो रहे इस बदलाव को करीब से देख सकें।





