संघर्ष से सफलता तक: ‘द गोल मशीन’ अनुष्का का प्रेरणादायक सफर
रांची।
झारखंड की बेटियाँ आज हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं। खेल के मैदान में भी राज्य की बेटियाँ लगातार इतिहास रच रही हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है अनुष्का कुमारी, जिन्हें आज लोग प्यार से ‘द गोल मशीन’ के नाम से जानते हैं।
बचपन से फुटबॉल का जुनून
अनुष्का का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उनके भीतर फुटबॉल के प्रति गहरा जुनून था। गांव की कच्ची ज़मीन पर खेलते हुए उन्होंने अपने सपनों को आकार देना शुरू किया। कई बार सुविधाओं की कमी और सामाजिक चुनौतियाँ भी सामने आईं, लेकिन अनुष्का ने कभी हार नहीं मानी।
मैदान पर बनाया अलग मुकाम
कम उम्र में ही अनुष्का ने अपने शानदार प्रदर्शन से सबका ध्यान खींचा। लगातार गोल करने की क्षमता के कारण साथी खिलाड़ी और कोच उन्हें ‘द गोल मशीन’ कहने लगे। जिला और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में बेहतरीन प्रदर्शन कर उन्होंने यह साबित कर दिया कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती।
मुख्यमंत्री ने किया सम्मानित
अनुष्का की मेहनत और उपलब्धियों को देखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उन्हें सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने न सिर्फ उनकी सराहना की, बल्कि उनके गांव में खेल सुविधाओं के विकास के निर्देश भी दिए। यह कदम झारखंड में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
सरकार से मिलेगा सहयोग
राज्य सरकार की खेल नीति के तहत अनुष्का को बेहतर प्रशिक्षण, सुविधाएं और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की योजना है। इससे न सिर्फ अनुष्का बल्कि गांव की अन्य बेटियों को भी खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।
युवाओं के लिए प्रेरणा
अनुष्का की कहानी यह संदेश देती है कि अगर हौसले मजबूत हों, तो हालात भी रास्ता बना देते हैं। आज वह झारखंड की हजारों बेटियों के लिए एक मिसाल बन चुकी हैं।
‘द गोल मशीन’ अनुष्का का यह सफर साबित करता है कि सपने छोटे नहीं होते, बस उन्हें पूरा करने का जज़्बा बड़ा होना चाहिए।




