
सेंट्रल डेस्क। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के बीच बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने दो हफ्ते के युद्धविराम पर सहमति जताई है। साथ ही यह भी घोषणा की गई है कि दोनों देशों के बीच वार्ता पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शुक्रवार को होगी। अल जजीरा के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी हमलों को दो सप्ताह के लिए “स्थगित” करने की बात कही है। उन्होंने साफ किया कि यह युद्धविराम इस शर्त पर आधारित है कि ईरान तुरंत Strait of Hormuz को पूरी तरह सुरक्षित और खुला रखे। दो हफ्ते का यह युद्धविराम वैश्विक तनाव को कम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अब सबकी नजर इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता पर टिकी है, जहां इस समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है।
होरमुज बना तनाव की बड़ी वजह
ईरान द्वारा इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर आंशिक नाकेबंदी के कारण वैश्विक व्यापार प्रभावित हुआ है। दुनिया की करीब 20% तेल आपूर्ति इसी रास्ते से होती है, जिसके चलते तेल की कीमतों में उछाल और कई देशों में ईंधन संकट देखने को मिला।
संघर्ष का दायरा बढ़ा
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़े तनाव का असर पूरे क्षेत्र में देखने को मिला है। लेबनान के Hezbollah और यमन के Houthis ने भी इजरायल पर हमले किए, जिससे संघर्ष और व्यापक हो गया।
10 सूत्रीय प्रस्ताव पर बातचीत
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को ईरान की ओर से 10 बिंदुओं का प्रस्ताव मिला है, जिसे बातचीत के लिए “व्यावहारिक आधार” माना जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि कई मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और अगले दो हफ्तों में समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने भी युद्धविराम की पुष्टि करते हुए कहा कि यदि ईरान पर हमले बंद होते हैं तो उसकी सेना भी अपनी रक्षात्मक कार्रवाई रोक देगी। उन्होंने यह भी कहा कि होरमुज़ जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवाजाही ईरानी सेना के समन्वय से संभव होगी।
पाकिस्तान की भूमिका अहम
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने इस युद्धविराम को “तुरंत प्रभावी” बताया और दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल को 10 अप्रैल 2026 को इस्लामाबाद में वार्ता के लिए आमंत्रित किया।
ईरान की प्रमुख मांगें
ईरान के प्रस्ताव में कई अहम मांगें शामिल हैं:
- होरमुज़ जलडमरूमध्य पर नियंत्रण और निगरानी
- मध्य पूर्व से अमेरिकी सेना की वापसी
- क्षेत्रीय सहयोगी समूहों पर हमले बंद करना
- युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई
- सभी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को हटाना
- विदेशों में जमे ईरानी संपत्तियों की वापसी
- अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मंजूरी
हालांकि ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह अमेरिका पर “पूरी तरह भरोसा नहीं करता” और किसी भी गलती की स्थिति में कड़ी प्रतिक्रिया देने को तैयार है।
इजरायल की प्रतिक्रिया का इंतजार
इस पूरे घटनाक्रम पर अभी तक Israel की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।





