
ईरान और इजराइल (अमेरिका की भागीदारी के साथ) के बीच चल रहा युद्ध अब पांचवें दिन में प्रवेश कर चुका है। यह संघर्ष 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर अचानक हमले किए। ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei की मौत की खबरों के बाद ईरान ने बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी।
4 मार्च तक के प्रमुख अपडेट्स
इजराइल के हमले
इजराइली सेना Israeli Defense Forces (IDF) ने दावा किया है कि उसने ईरान की राजधानी Tehran में व्यापक हवाई हमले किए। इन हमलों में रिवॉल्यूशनरी गार्ड के कमांड सेंटर, बसिज मिलिशिया के ठिकाने, मिसाइल लॉन्चर और आंतरिक सुरक्षा ढांचे को निशाना बनाया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, एक इजराइली F-35 लड़ाकू विमान ने तेहरान के ऊपर ईरानी YAK-130 फाइटर जेट को मार गिराया।
ईरान के जवाबी हमले
ईरान ने इजराइल के साथ-साथ खाड़ी देशों और अमेरिकी ठिकानों पर भी मिसाइल और ड्रोन हमले किए। Dubai में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के पास ड्रोन हमला हुआ। इसके अलावा Saudi Arabia, Kuwait और Bahrain में स्थित अमेरिकी ठिकानों को भी निशाना बनाया गया। बताया जा रहा है कि ईरान ने सैकड़ों मिसाइल और ड्रोन लॉन्च किए। एक रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि Sri Lanka के पास एक ईरानी युद्धपोत अमेरिकी पनडुब्बी के टॉरपीडो हमले के बाद डूब गया।
हताहत
ईरानी मीडिया के अनुसार, अमेरिका-इजराइल के हमलों में अब तक 1,045 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
इजराइल और Lebanon में भी कई लोग हताहत हुए हैं। दक्षिण लेबनान में इजराइली बमबारी जारी है, जहां IDF ने जमीनी अभियान तेज कर दिया है। ईरान समर्थित संगठन Hezbollah के ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है।
अन्य प्रमुख घटनाएं
- अमेरिकी सीनेट में युद्ध शक्तियों (War Powers Resolution) को लेकर मतदान होने वाला है।
- रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और इजराइल ईरान के भीतर अलगाववादी समूहों को समर्थन दे रहे हैं, जिससे जातीय गृहयुद्ध की आशंका बढ़ गई है।
- इजराइल ने ईरान के संभावित अगले नेतृत्व को भी निशाना बनाने की चेतावनी दी है।
- Strait of Hormuz में तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है।
क्षेत्रीय प्रभाव
यह युद्ध अब पूरे मिडिल ईस्ट में फैल चुका है। इसमें लेबनान, खाड़ी देश और अमेरिकी सैन्य ठिकाने सीधे तौर पर शामिल हो गए हैं। दोनों पक्षों की ओर से ‘रिजीम चेंज’ और परमाणु कार्यक्रम को रोकने जैसे लक्ष्य बताए जा रहे हैं, लेकिन हालात बेहद तनावपूर्ण और अनिश्चित बने हुए हैं।





