दावोस में ‘जोहार’ की गूंज: 25 साल के युवा झारखंड ने दुनिया के सामने रखा ‘प्रकृति के साथ विकास’ का मॉडल

दावोस/रांची। स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (WEF) में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) की एक उच्चस्तरीय बैठक में हिस्सा लिया। इस बैठक का मुख्य मुद्दा दुनिया भर में विकास को ‘टिकाऊ’ (Sustainable) बनाना था।
मुख्यमंत्री के संबोधन की प्रमुख बातें इस प्रकार हैं:
1. संसाधनों का सही इस्तेमाल और स्थानीय लाभ
मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि झारखंड अब केवल खनिज (खनिज और कोयला) बाहर भेजने वाला राज्य बनकर नहीं रहना चाहता। सरकार का लक्ष्य है कि इन संसाधनों से राज्य में ही नई चीजें बनाई जाएं (Value Addition), ताकि यहाँ के लोगों को सीधा फायदा और रोजगार मिल सके।
2. जिम्मेदार विकास का मंत्र
उन्होंने कहा कि हमारा मकसद प्रकृति को नुकसान पहुंचाकर पैसा कमाना नहीं है। हम चाहते हैं कि उद्योगों का विकास इस तरह हो जिससे:
- स्थानीय लोगों और आदिवासियों को काम मिले।
- उनका हुनर (Skill) बढ़े।
- समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चला जाए।
3. हरित तकनीक और रोजगार
मुख्यमंत्री ने बताया कि झारखंड अब खनिज आधारित उद्योगों के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा (Solar Energy) और हरित तकनीक (Green Tech) को बढ़ावा दे रहा है। इससे न केवल पर्यावरण बचेगा, बल्कि युवाओं के लिए नए तरह के रोजगार भी पैदा होंगे।
4. पर्यटन (Tourism) बनेगा नई ताकत
मुख्यमंत्री ने झारखंड की खूबसूरती और संस्कृति का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में इको-टूरिज्म (प्रकृति से जुड़ा पर्यटन) की अपार संभावनाएं हैं। वे चाहते हैं कि पर्यटन को इस तरह विकसित किया जाए कि राज्य की संस्कृति भी सुरक्षित रहे और स्थानीय लोगों को अपनी ही जमीन पर रोजगार मिले।
निवेशकों को न्योता
अंत में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दुनिया भर के बड़े निवेशकों को झारखंड आने का न्योता दिया। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार खनन, सौर ऊर्जा और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में निवेश के लिए झारखंड एक बेहतरीन और सुरक्षित जगह है।
निष्कर्ष: इस बैठक में झारखंड की भागीदारी यह दिखाती है कि राज्य अब सिर्फ आर्थिक तरक्की नहीं, बल्कि पर्यावरण की रक्षा और समाज की भलाई के साथ आगे बढ़ना चाहता है।





