
ED Action: आलमगीर आलम केस में नया मोड़, इंजीनियरों की बढ़ी मुश्किलें, ED की 5वीं चार्जशीट, भ्रष्टाचार मामले में बड़ा एक्शन, 3% कमीशन का खेल, झारखंड में टेंडर घोटाले का खुलासा
रांची। झारखंड के बहुचर्चित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 18 मार्च 2026 को रांची स्थित विशेष PMLA अदालत में 5वीं सप्लीमेंट्री प्रोसिक्यूशन शिकायत (Prosecution Complaint) दायर की है। यह मामला प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 की धारा 44 और 45 के तहत दर्ज है।
14 इंजीनियर और अधिकारी बने नए आरोपी
ED द्वारा दायर शिकायत में ग्रामीण कार्य विभाग (RWD), ग्रामीण विकास विशेष प्रखंड (RDSZ) और झारखंड स्टेट रूरल रोड डेवलपमेंट अथॉरिटी (JSRRDA) के कुल 14 इंजीनियरों और अधिकारियों को नए आरोपी के रूप में शामिल किया गया है। इनके जुड़ने से अब इस मामले में कुल आरोपियों की संख्या बढ़कर 36 हो गई है।
क्या है पूरा मामला
यह मामला वर्ष 2019 में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB), जमशेदपुर में दर्ज FIR संख्या 13/2019 से जुड़ा है। जांच में सामने आया कि विभाग में एक संगठित कमीशनखोरी (ब्राइबरी रैकेट) चल रही थी, जिसमें टेंडर आवंटन के बदले कुल टेंडर राशि का 3% कमीशन लिया जाता था।
कमीशन का बंटवारा कैसे होता था
ED की जांच के अनुसार:
- कुल कमीशन का 1.35% तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम को दिया जाता था
- 0.65% विभागीय सचिव को मिलता था
- बाकी राशि मुख्य अभियंताओं और अधीनस्थ इंजीनियरों में बांटी जाती थी
बताया गया कि कुल टेंडर आवंटन करीब ₹3048 करोड़ का था, जिसमें अपराध की आय (Proceeds of Crime) ₹90 करोड़ से अधिक आंकी गई है।
किन-किन अधिकारियों के नाम शामिल
नए आरोपियों में सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता सिंगराई टुटी, राजीव लोचन, सुरेंद्र कुमार, प्रमोद कुमार सहित कई कार्यपालक और सहायक अभियंता शामिल हैं। इसके अलावा पूर्व अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता स्तर के अधिकारी भी जांच के दायरे में हैं। नए आरोपियों के रूप में शामिल किए गए 14 व्यक्तियों में सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता सिंगराई टुटी, राजीव लोचन, सुरेंद्र कुमार और प्रमोद कुमार शामिल हैं। इसके अलावा कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार, अजय कुमार, अजय तिर्की, राज कुमार टोप्पो, अशोक कुमार गुप्ता, सिद्धांत कुमार और अनिल कुमार (सेवानिवृत्त) को भी आरोपी बनाया गया है। साथ ही सहायक अभियंता राम पुकार राम और रमेश ओझा (दोनों सेवानिवृत्त) तथा पूर्व अधीक्षण अभियंता/इंजीनियर-इन-चीफ उमेश कुमार (सेवानिवृत्त) का नाम भी इसमें शामिल है। जांच में पाया गया कि ये सभी अवैध कमीशन की वसूली, संग्रह और वितरण में सक्रिय रूप से शामिल थे, जो कि मनी लॉन्ड्रिंग कानून (PMLA) की धारा 2(1)(u) के तहत अपराध की आय (Proceeds of Crime) की श्रेणी में आता है।
ED की अब तक की कार्रवाई
- झारखंड, दिल्ली और बिहार में 52 ठिकानों पर छापेमारी
- 9 लोगों की गिरफ्तारी, जिनमें मंत्री आलमगीर आलम और उनके निजी सचिव (संजीव कुमार लाल) भी शामिल
- ₹44 करोड़ की संपत्ति अटैच (जप्त)
- ₹38 करोड़ से अधिक की नकदी बरामद
- कई लग्जरी वाहन भी जब्त
जांच में क्या सामने आया
ED की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी अधिकारी कमीशन की वसूली, संग्रह और वितरण में सक्रिय रूप से शामिल थे। यह पूरा पैसा मनी लॉन्ड्रिंग के तहत अपराध की आय (PoC) माना गया है।
पहले भी दायर हो चुकी हैं शिकायतें
इससे पहले ED इस मामले में मुख्य प्रोसिक्यूशन शिकायत (PC) और 4 सप्लीमेंट्री शिकायतें अदालत में दाखिल कर चुकी है, जिन पर कोर्ट संज्ञान भी ले चुका है।
समझें..
झारखंड के इस बड़े भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED की कार्रवाई लगातार तेज हो रही है। नए आरोपियों के जुड़ने से यह साफ है कि जांच अभी और गहराई तक जाएगी और आने वाले समय में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।





