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Thursday, February 12, 2026
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वंदे मातरम पर नई गाइडलाइन: अब ‘जन गण मन’ से पहले 3.10 मिनट तक बजेगा राष्ट्रगीत, खड़े रहना हुआ अनिवार्य

भारत के राष्ट्रपति भवन के सामने तिरंगे झंडे के नीचे राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के सम्मान में खड़े औपचारिक वेशभूषा में लोगों की भीड़।
नए प्रोटोकॉल के तहत 'वंदे मातरम' के दौरान सम्मान में खड़े नागरिक और लहराता तिरंगा।
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केंद्र सरकार ने बुधवार, 11 फरवरी 2026 को राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के संबंध में नई गाइडलाइंस जारी की हैं। गृह मंत्रालय द्वारा जारी इस आदेश के तहत अब सभी सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम का पूरा छह अंतरा वाला संस्करण अनिवार्य कर दिया गया है। यह फैसला राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान और जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है, जिसे राष्ट्रगान से ठीक पहले प्रोटोकॉल के तहत लागू किया जाएगा।

मुख्य घोषणा अब राष्ट्रगान से पहले होगा राष्ट्रगीत का गायन, पूरे छह छंद बजाना हुआ जरूरी

गृह मंत्रालय द्वारा जारी नए प्रोटोकॉल के अनुसार, अब किसी भी आधिकारिक आयोजन में राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ से पहले ‘वंदे मातरम’ गाया या बजाया जाएगा। इस नए संस्करण की कुल अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड तय की गई है। खास बात यह है कि अब गीत के उन चार छंदों को भी शामिल कर लिया गया है, जिन्हें साल 1937 में हटा दिया गया था। यह नियम राष्ट्रीय ध्वज फहराने, राष्ट्रपति के आगमन, और महत्वपूर्ण सरकारी संबोधनों के दौरान अनिवार्य रूप से लागू होगा।

Highlights

  • वंदे मातरम के सभी 6 छंदों का गायन अब अनिवार्य होगा।
  • गीत की कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकंड निर्धारित की गई है।
  • कार्यक्रमों में इसे राष्ट्रगान (National Anthem) से पहले बजाया जाएगा।
  • गायन के दौरान उपस्थित सभी व्यक्तियों का खड़े होना अनिवार्य है।
  • सिनेमा घरों को फिलहाल इन नए नियमों से मुक्त रखा गया है।
  • स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में इसे प्रार्थना के दौरान बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं।

गृह मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार, “इस कदम का मुख्य उद्देश्य देश के नागरिकों, विशेषकर युवाओं और छात्रों के बीच राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान और संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूकता पैदा करना है।”

इस बदलाव का सबसे बड़ा असर सरकारी स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों पर पड़ेगा, जहाँ अब दैनिक प्रार्थना में वंदे मातरम का पूर्ण रूप सुनाई देगा। आम जनता के लिए भी अब किसी भी सरकारी समारोह में राष्ट्रगीत के दौरान राष्ट्रगान की तरह ही सावधान की मुद्रा में खड़ा होना जरूरी होगा। हालांकि, सिनेमा हॉल को छूट मिलने से आम दर्शकों को बड़ी राहत मिली है।

ऐतिहासिक रूप से, ‘वंदे मातरम’ की रचना बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1875 में की थी। मूल रूप से इसमें 6 पद हैं (2 संस्कृत और 4 बंगाली मिश्रण)। 1937 में कांग्रेस ने इसके केवल शुरुआती दो पदों को ही आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया था, लेकिन अब सरकार ने इसके मूल और पूर्ण स्वरूप को राष्ट्रीय गौरव के साथ दोबारा जोड़ने का निर्णय लिया है।

सरकार की योजना इस पहल के माध्यम से देश के गौरवशाली इतिहास को जन-जन तक पहुँचाने की है। आने वाले समय में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इसे समान रूप से लागू किया जाएगा, जिससे राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक पहचान को और मजबूती मिलने की उम्मीद है

गृह मंत्रालय का यह निर्णय ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान के समकक्ष सम्मान देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। 3 मिनट 10 सेकंड का यह पूर्ण गायन अब भारत के हर औपचारिक उत्सव की पहचान बनेगा, जो देश की सांस्कृतिक विरासत और देशभक्ति की भावना को और प्रगाढ़ करेगा।

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