रांची में हाई कोर्ट के आदेश पर बड़ी कार्रवाई: भारी विरोध के बीच खादगड़ा में चले बुलडोजर, कई पक्के मकान जमींदोज

रांची (झारखंड): गुरुवार को रांची के सुखदेव नगर थाना क्षेत्र अंतर्गत खादगड़ा मिलन चौक पर जिला प्रशासन ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में एक बड़ी दखल दिहानी कार्रवाई को अंजाम दिया। झारखंड हाई कोर्ट के आदेश का अनुपालन करते हुए, प्रशासन ने तीन बुलडोजरों की मदद से कई पक्के मकानों और बड़ी बिल्डिंगों को ध्वस्त कर दिया। इस दौरान स्थानीय लोगों और पुलिस के बीच तीखी झड़प और धक्का-मुक्की हुई, लेकिन विरोध के बावजूद प्रशासन ने कार्रवाई पूरी की।
महादेव उरांव को दखल दिहानी दिलाने के लिए चला बुलडोजर
प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी अतिक्रमण हटाओ अभियान का हिस्सा नहीं, बल्कि झारखंड हाई कोर्ट के उस आदेश का पालन है, जिसमें महादेव उरांव को उनकी जमीन पर कब्जा (दखल दिहानी) दिलाने का निर्देश दिया गया था।सुबह जैसे ही तीन बुलडोजर और भारी सुरक्षा बल खादगड़ा मिलन चौक पहुंचे, वहां हड़कंप मच गया। स्थानीय निवासी, विशेषकर महिलाएं, बुलडोजरों के सामने खड़ी हो गईं। पुलिस और जनता के बीच कई बार आमने-सामने की स्थिति बनी और जमकर धक्का-मुक्की हुई। रांची के विधायक सीपी सिंह ने भी मौके पर पहुंचकर इस कार्रवाई को रोकने की अपील की, लेकिन कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए प्रशासन ने निर्माण गिराना जारी रखा।
प्रमुख बिंदु
- तीन बुलडोजरों का इस्तेमाल: बड़ी इमारतों को पल भर में गिराने के लिए प्रशासन ने एक साथ तीन मशीनें लगाईं।
- सड़कों पर आक्रोश: रातू रोड कब्रिस्तान के पास टायर जलाकर रास्ता जाम किया गया और विरोध प्रदर्शन हुआ।
- भारी पुलिस बल: सुखदेव नगर थाना समेत कई थानों की पुलिस और अतिरिक्त बल मौके पर तैनात रहे।
- राजनीतिक हस्तक्षेप: विधायक सीपी सिंह ने मौके पर पहुंचकर दखल देने की कोशिश की, मगर कार्रवाई नहीं रुकी।
“यह कार्रवाई माननीय झारखंड हाई कोर्ट के आदेशानुसार महादेव उरांव को उनकी जमीन का वास्तविक कब्जा दिलाने के लिए की गई है। प्रशासन केवल कानून और न्यायालय के निर्देशों का पालन कर रहा है।” — प्रशासनिक अधिकारी (मौके पर तैनात)
जनता पर प्रभाव और मानवीय संवेदनाएं
कार्रवाई के दौरान वहां का माहौल अत्यंत भावुक और तनावपूर्ण रहा। जिन परिवारों के घर टूट रहे थे, उनकी महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल था। सालों की जमा पूंजी से खड़े किए गए पक्के मकानों को मलबे में तब्दील होते देख लोग आक्रोशित और असहाय नजर आए। विरोध का असर यातायात पर भी पड़ा, जिससे रातू रोड इलाके में घंटों जाम की स्थिति बनी रही।
यह मामला जमीन के मालिकाना हक और कब्जे से जुड़ा है। महादेव उरांव नामक व्यक्ति ने अपनी जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत के बाद कानूनी लड़ाई लड़ी थी। लंबी सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए प्रशासन को ‘दखल दिहानी’ सुनिश्चित करने का आदेश दिया था, जिसके क्रियान्वयन के लिए आज प्रशासन ने बल प्रयोग किया।
भविष्य की संभावना
इस कार्रवाई के बाद इलाके में तनाव व्याप्त है, जिसे देखते हुए सुखदेव नगर और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है। बेघर हुए लोग अब पुनर्वास या कानूनी राहत के लिए ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं, जबकि प्रशासन का कहना है कि वे पूरी जमीन खाली कराकर ही दम लेंगे।
खादगड़ा मिलन चौक पर हुई यह कार्रवाई कानून और मानवीय संवेदनाओं के बीच के द्वंद्व को दर्शाती है। हालांकि, हाई कोर्ट के आदेश के सामने स्थानीय विरोध और राजनीतिक दबाव बेअसर रहा। प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए यह साफ कर दिया कि अदालती आदेशों के उल्लंघन की कोई गुंजाइश नहीं है।
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