Nicolas Maduro’s का पतन: ड्रग्स, चुनाव धांधली और तेल की राजनीति ने कैसे बदला वेनेजुएला का भविष्य?
विशेष विश्लेषण: निकोलस मादुरो का पतन – ड्रग्स, लोकतंत्र और तेल की जटिल राजनीति
वेनेजुएला, जो कभी लैटिन अमेरिका का सबसे समृद्ध देश माना जाता था, आज इतिहास के एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। जनवरी 2026 में हुए घटनाक्रमों ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के लंबे और विवादास्पद शासन पर वैश्विक बहस को और तेज कर दिया है।
यह सवाल अब अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में है — क्या मादुरो को सिर्फ तेल के लिए निशाना बनाया गया, या इसके पीछे इससे कहीं अधिक गहरे कारण थे?
बस ड्राइवर से सत्ता के शिखर तक: मादुरो का राजनीतिक सफर
निकोलस मादुरो की कहानी असाधारण रही है।
काराकास मेट्रो में बस ड्राइवर के रूप में करियर शुरू करने वाले मादुरो ट्रेड यूनियन राजनीति से होते हुए ह्यूगो शावेज के करीबी बने।
शावेज के ‘बोलिवेरियन आंदोलन’ से जुड़ने के बाद मादुरो विदेश मंत्री, फिर उपराष्ट्रपति बने और 2013 में शावेज की मृत्यु के बाद वेनेजुएला की सत्ता संभाली।
सत्ता के साथ संकट: अर्थव्यवस्था, दमन और पलायन
मादुरो के शासनकाल में वेनेजुएला लगातार संकट में फँसता गया।
- आर्थिक पतन:
तेल पर अत्यधिक निर्भरता, कुप्रबंधन और प्रतिबंधों के चलते देश अति-मुद्रास्फीति की चपेट में आ गया। हालात ऐसे बने कि रोजमर्रा की चीजें आम लोगों की पहुंच से बाहर हो गईं। - मानवीय त्रासदी:
संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के अनुसार, लाखों लोग भुखमरी, दवाओं की कमी और बेरोजगारी के कारण देश छोड़ने को मजबूर हुए। - मानवाधिकार आरोप:
विरोध प्रदर्शनों के दमन, कथित एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल हत्याओं और राजनीतिक बंदियों को लेकर मादुरो सरकार लगातार आलोचना के घेरे में रही।
2024 का चुनाव और वैधता पर सवाल
2024 के राष्ट्रपति चुनावों के बाद संकट और गहरा गया।
अमेरिका और कई पश्चिमी देशों ने दावा किया कि विपक्षी उम्मीदवार एडमुंडो गोंजालेज को जनसमर्थन मिला था, लेकिन सत्ता हस्तांतरण नहीं हुआ।
यहीं से मादुरो सरकार की वैधता पर अंतरराष्ट्रीय सवाल और तेज हो गए।
अमेरिका की आधिकारिक दलील: नार्को-टेररिज्म का मामला
अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, जनवरी 2026 की कार्रवाई का मुख्य आधार नार्को-टेररिज्म और अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी से जुड़े आरोप थे।
- अमेरिकी न्याय विभाग का दावा है कि 2020 से चले आ रहे मामलों को 2026 में सार्वजनिक किया गया।
- आरोपों में मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस पर कोकेन तस्करी की साजिश, भारी हथियार रखने और ‘ट्रेन डे अरागुआ’ जैसे आपराधिक गिरोहों से संबंध शामिल हैं।
- इन्हीं आरोपों के तहत मादुरो की गिरफ्तारी पर 50 मिलियन डॉलर का इनाम घोषित किया गया था।
व्हाइट हाउस ने कथित ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ को एक कानून प्रवर्तन कार्रवाई बताया, जिसमें सैन्य सहायता ली गई।
तेल की भूमिका: वजह या रणनीतिक लाभ?
मादुरो और उनके समर्थक देशों — रूस, चीन और ईरान — का लंबे समय से आरोप रहा है कि अमेरिका की नजर वेनेजुएला के तेल पर है।
यह आरोप पूरी तरह खारिज भी नहीं किया जा सकता।
- वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार है (लगभग 303 अरब बैरल)।
- शावेज-मादुरो युग में तेल उत्पादन 3.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन से गिरकर करीब 1 मिलियन बैरल रह गया।
- विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका उत्पादन बहाली और निवेश के जरिए रणनीतिक व आर्थिक लाभ देख रहा है।
यही कारण है कि कई विशेषज्ञ इसे ड्रग्स + लोकतंत्र + तेल — तीनों का मिश्रित मामला मानते हैं।
वर्तमान स्थिति और आगे की राह
जनवरी 2026 के बाद वेनेजुएला एक अनिश्चित दौर में प्रवेश कर चुका है।
- राजनीतिक अस्थिरता: सत्ता संतुलन और सेना की भूमिका अभी स्पष्ट नहीं है।
- भू-राजनीतिक टकराव: रूस और चीन ने इसे संप्रभुता का उल्लंघन बताया है, जिससे वेनेजुएला वैश्विक शक्तियों के बीच खींचतान का केंद्र बन गया है।
- पुनर्निर्माण की चुनौती: अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना और करोड़ों प्रवासियों की संभावित वापसी सबसे बड़ी परीक्षा होगी।
निष्कर्ष
निकोलस मादुरो का पतन सिर्फ किसी एक कारण की कहानी नहीं है।
यह तानाशाही, आर्थिक कुप्रबंधन, लोकतांत्रिक संकट, अंतरराष्ट्रीय दबाव और संसाधनों की राजनीति का संयुक्त परिणाम है।
वेनेजुएला अब ‘पोस्ट-मादुरो’ युग में प्रवेश कर रहा है, जहाँ उम्मीदें तो बहुत हैं — लेकिन रास्ता आसान नहीं।





