इंदौर जल संकट पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का विवादित बयान। वीडियो वायरल होने के बाद जताया खेद
मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित भगीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से हुई मौतों के बीच नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय एक बड़े मीडिया विवाद में घिर गए हैं। हालात का जायजा लेने पहुंचे मंत्री ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान आपा खो दिया और ऑन-कैमरा अभद्र शब्दों का इस्तेमाल कर बैठे, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
क्या है पूरा मामला
इंदौर-1 विधानसभा क्षेत्र के भगीरथपुरा और आसपास के इलाकों में दूषित पानी पीने से गंभीर स्वास्थ्य संकट उत्पन्न हो गया है। अब तक 4 लोगों की आधिकारिक मौत की पुष्टि हुई है, जबकि स्थानीय लोगों का दावा है कि मृतकों की संख्या 13 तक पहुंच चुकी है। वहीं, 200 से अधिक लोग डायरिया और संक्रमण की शिकायत के साथ अस्पतालों में भर्ती हैं।
बुधवार रात जब मंत्री कैलाश विजयवर्गीय क्षेत्र का दौरा करने पहुंचे, तो पत्रकारों ने उनसे सरकार की लापरवाही, जल आपूर्ति की विफलता और निजी अस्पतालों में इलाज के भारी खर्च को लेकर सवाल पूछे। सवालों से नाराज मंत्री ने एक पत्रकार को ‘फोकट के सवाल’ न करने की नसीहत दी और इसी दौरान “घंटा” जैसे शब्द का इस्तेमाल कर दिया।
वीडियो वायरल, माफी में बोले मंत्री
घटना का वीडियो सामने आने के बाद मंत्री विजयवर्गीय की चौतरफा आलोचना शुरू हो गई। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर सफाई देते हुए खेद जताया। मंत्री ने लिखा—
“मेरे क्षेत्र के लोग पीड़ा में हैं, पिछले दो दिनों से मैं सोया नहीं हूं। दुख और तनाव की स्थिति में मीडिया के सवाल पर मेरे मुंह से गलत शब्द निकल गया, जिसका मुझे खेद है।”
सरकार की कार्रवाई
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मामले को गंभीर बताते हुए इसे ‘इमरजेंसी स्थिति’ करार दिया है। सरकार ने मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही, लापरवाही बरतने वाले कुछ अधिकारियों को निलंबित किया गया है और पूरे जल आपूर्ति तंत्र की जांच के आदेश दिए गए हैं।
विपक्ष का हमला
इस घटना को लेकर विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मंत्री के व्यवहार को “सत्ता का अहंकार” बताया और कहा कि जब लोग दूषित पानी से जान गंवा रहे हैं, तब मंत्री का मीडिया और जनता के प्रति ऐसा रवैया अस्वीकार्य है। कांग्रेस ने मंत्री से इस्तीफे की मांग भी की है।