झारखंड की आर्थिक उड़ान: पहली बार प्रति व्यक्ति आय ₹1 लाख के पार, सर्विसेज सेक्टर ने रचा इतिहास

रांची। झारखंड अब केवल खेती और खदानों वाला राज्य नहीं रहा, बल्कि यहां सर्विसेज सेक्टर (जैसे बैंकिंग, आईटी, ट्रांसपोर्ट) सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है। झारखंड अब धीरे-धीरे अपनी पुरानी पहचान (सिर्फ उद्योग और खनन) से बाहर निकलकर एक आधुनिक सर्विस-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। अब सबकी निगाहें 24 फरवरी पर टिकी हैं, जब वित्त मंत्री नया बजट पेश करेंगे। झारखंड विधानसभा में वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर के द्वारा चौथे दिन (21.2.26) पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की आर्थिक सेहत में सुधार के ये रहे मुख्य बिंदु:
1. सर्विसेज सेक्टर बना नया ‘पावरहाउस’
पिछले 13-14 सालों में झारखंड की अर्थव्यवस्था का चेहरा बदल गया है।
- बड़ी छलांग: साल 2011-12 में सर्विसेज सेक्टर का योगदान 38.54% था, जो अब बढ़कर 45.56% हो गया है।
- उद्योगों को पछाड़ा: अब राज्य की कमाई में सर्विसेज सेक्टर का हिस्सा उद्योगों से कहीं ज्यादा है। अकेले वित्तीय सेवाओं (Financial Services) में 11% से 19% की भारी ग्रोथ देखी गई है।
2. आम आदमी की कमाई (प्रति व्यक्ति आय)
रिपोर्ट के मुताबिक, झारखंड के लोगों की सालाना कमाई में लगातार सुधार हो रहा है:
- अनुमान: साल 2025-26 में एक औसत व्यक्ति की आय ₹71,994 और 2026-27 में ₹75,670 तक पहुँचने की उम्मीद है।
- तुलना: हालांकि यह राष्ट्रीय औसत का लगभग 60% ही है, लेकिन पिछले कई सालों से यह स्तर स्थिर बना हुआ है।
3. विकास की रफ्तार (GSDP Growth)
- झारखंड की अर्थव्यवस्था 2024-25 में 7.02% की दर से बढ़ी थी, जो पूरे देश की औसत ग्रोथ (6.5%) से भी बेहतर थी।
- अगले साल (2026-27) इसके 5.96% की रफ्तार से बढ़ने का अनुमान है।
4. गरीबी में आई बड़ी कमी
राज्य के लिए सबसे राहत की बात गरीबी के आंकड़ों में गिरावट है:
- बड़ा सुधार: 2015-16 में जहां 42.10% लोग गरीब थे, वह 2019-21 में घटकर 28.81% रह गए।
- कारण: बिजली (सौभाग्य योजना), शौचालय (स्वच्छ भारत), और साफ़ पानी (जल जीवन मिशन) जैसी योजनाओं ने लोगों का जीवन स्तर सुधारा है।
5. बजट और खर्च का हिसाब
- बड़ा बजट: झारखंड का बजट जो कभी 6 हजार करोड़ का हुआ करता था, अब बढ़कर 1.45 लाख करोड़ (2025-26 के लिए) से ज्यादा हो गया है।
- सही जगह खर्च: सरकार अब अपना ज्यादा पैसा (करीब 60%) विकास योजनाओं और बुनियादी ढांचे (पूंजीगत व्यय) पर खर्च कर रही है, न कि केवल कर्मचारियों की सैलरी या पुराने खर्चों पर।
- अनुशासन: राज्य का राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) भी कंट्रोल में है और तय सीमा (3%) के भीतर है।





