
इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर बड़ा हमला किया है। ईरान की राजधानी तेहरान में धमाकों की आवाजें सुनी गईं। इजरायल के रक्षा मंत्री ने इस हमले की पुष्टि की है। तेहरान के अलावा कोम, खोर्रमाबाद और इस्फहान में भी मिसाइलें दागी गईं। कुछ सरकारी दफ्तरों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसके जवाब में ईरान ने भी इजरायल पर कई मिसाइलें दागीं। इजरायल के शहर तेल अवीव, हाइफा और गैलीली को निशाना बनाया गया। इजरायल ने अपने नागरिकों से कहा है कि वे सुरक्षित शेल्टर के पास रहें। इस हमले में अमेरिका भी शामिल रहा। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वे ईरान को परमाणु बम बनाने नहीं देंगे। अल जजीरा के अनुसार यूनाइटेड स्टेट्स के प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि US ने ईरान में “बड़े कॉम्बैट ऑपरेशन” शुरू कर दिए हैं, जबकि इजराइल ने भी कहा था कि उसने ईरान पर मिसाइल हमले किए हैं। रेड क्रिसेंट का हवाला देते हुए ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि 24 प्रांतों में कम से कम 201 लोग मारे गए हैं। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजराइल और कतर, UAE, कुवैत, बहरीन, जॉर्डन, सऊदी अरब और इराक समेत कई मिडिल ईस्ट देशों में US के एसेट्स को निशाना बनाया है।
201 लोगों की मौत हो गई
ईरान की ईरान रेड क्रिसेंट सोसाइटी के एक प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका और इजराइल के हमलों में ईरान के 24 प्रांतों को निशाना बनाया गया है। इन हमलों में कम से कम 201 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 747 लोग घायल हुए हैं। प्रवक्ता ने कहा कि जिन इलाकों पर हमला हुआ है, वहां 220 से ज्यादा रेड क्रिसेंट की टीमें तैनात हैं और राहत व बचाव का काम लगातार जारी है।
स्कूल पर हमला, 85 की मौत
दक्षिणी ईरान के होर्मोजगान प्रांत के शहर मिनाब में एक प्राथमिक (एलिमेंट्री) लड़कियों के स्कूल पर इजराइली हमले में कई लोगों की मौत हो गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि इजराइल और ईरान पर अमेरिका की भारी बमबारी से आम नागरिकों को भी बड़ा नुकसान हो रहा है। ईरान की सेमी-ऑफिशियल तस्नीम न्यूज़ एजेंसी ने मिनाब की न्यायपालिका के हवाले से बताया कि शनिवार को स्कूल पर हुए हमले के बाद मरने वालों की संख्या बढ़कर 85 हो गई है।
ऑपरेशन सुबह 6:15 पर शुरू हुआ
अमेरिका की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा है कि उसकी सेना ने आज ईरान की तरफ से किए गए “सैकड़ों” मिसाइल और ड्रोन हमलों को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया। अमेरिका ने बताया कि इस हमले में उसके किसी भी सैनिक की मौत या घायल होने की खबर नहीं है। सेंट्रल कमांड के अनुसार, अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बहुत कम नुकसान हुआ है और इससे उनके ऑपरेशन पर कोई असर नहीं पड़ा है। अमेरिका ने बताया कि यह ऑपरेशन सुबह 06:15 GMT पर शुरू हुआ। इसमें ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांड और कंट्रोल सेंटर, एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट्स और सैन्य एयरफील्ड को निशाना बनाया गया। बयान में कहा गया कि ऑपरेशन के पहले कुछ घंटों में हवा, जमीन और समुद्र से सटीक हथियारों से हमला किया गया। इसके अलावा, CENTCOM की टास्क फोर्स “स्कॉर्पियन स्ट्राइक” ने पहली बार युद्ध में कम लागत वाले वन-वे अटैक ड्रोन का इस्तेमाल किया।
हमला ईरानी लोगों पर थोपा गया
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि ईरान की कार्रवाई आत्मरक्षा (सेल्फ-डिफेंस) में की जा रही है। हम पर बिना किसी उकसावे के एक बड़ा हमला किया गया है। यह हमला ईरानी लोगों पर थोपा गया है। बघाई ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार ईरान को अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने बताया कि ईरान की सेना अभी उसी अधिकार के तहत कार्रवाई कर रही है। उनका कहना था कि सेना इस हमले के खिलाफ ईरान की राष्ट्रीय संप्रभुता (आजादी) और देश की सीमा की रक्षा कर रही है।
अमेरिका का कूटनीति धोखा
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कुछ और बातें कही हैं। बघाई ने कहा, एक साल से भी कम समय में यह दूसरी बार है जब अमेरिका ने कूटनीति (बातचीत) को धोखा दिया है। उन्होंने बताया कि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत चल रही थी। सोमवार को न्यूक्लियर मुद्दे पर संभावित समझौते के तकनीकी पहलुओं पर चर्चा होनी थी। बघाई के मुताबिक, खुद अमेरिका भी मानता है कि अब तक की बातचीत अच्छी चल रही थी। इसके अलावा, बघाई ने कहा कि अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किया गया हमला इस क्षेत्र के देशों के भरोसे के साथ भी धोखा है। उन्होंने कहा, यह पूरे संयुक्त राष्ट्र (UN) सिस्टम के साथ भी धोखा है, क्योंकि UN चार्टर का मुख्य सिद्धांत ताकत के इस्तेमाल पर रोक लगाता है। प्रवक्ता ने आगे कहा कि इस हमले से न केवल क्षेत्र की सुरक्षा खतरे में है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून की व्यवस्था और UN चार्टर से बना पूरा सिस्टम भी दांव पर लगा हुआ है।
कुवैत में तरावीह की नमाज रद्द
कुवैत के इस्लामिक मामलों के मंत्रालय ने अगली सूचना तक सभी मस्जिदों में तरावीह की नमाज – रमजान के दौरान पढ़ी जाने वाली रात की नमाज – रद्द करने की घोषणा की है।
बढ़ते तनाव को तुरंत रोका जाए
कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जसीम अल थानी ने एक और विदेशी नेता से फोन पर बात की। इस बार उन्होंने यूरोपीय संघ (EU) की विदेश मामलों और सुरक्षा नीति की हाई रिप्रेजेंटेटिव काजा कैलास से बातचीत की। कतर विदेश मंत्रालय के बयान के मुताबिक, दोनों नेताओं ने क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव और उसके क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ने वाले खतरनाक असर पर चर्चा की। शेख मोहम्मद ने कहा कि कतर पर ईरान के हमले देश की राष्ट्रीय संप्रभुता (आजादी) का साफ उल्लंघन हैं। उन्होंने बढ़ते तनाव को तुरंत रोकने और सभी पक्षों से बातचीत की मेज पर लौटने की अपील की। बयान के अनुसार, काजा कैलास ने भी कतर पर ईरानी हमलों की निंदा की।





