पलामू में महाशिवरात्रि मेले में फूड पॉइजनिंग का मामला, गोलगप्पा खाने से दर्जनों बच्चे बीमार

झारखंड के पलामू जिले के पांकी प्रखंड स्थित द्वारिका गांव में महाशिवरात्रि मेले के दौरान गोलगप्पा खाने से दर्जनों बच्चे बीमार हो गए। फूड पॉइजनिंग की आशंका के बीच कई बच्चों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया है।
महाशिवरात्रि के मेले में मचा हड़कंप, कई बच्चों की हालत गंभीर
झारखंड के पलामू जिला अंतर्गत पांकी प्रखंड के द्वारिका गांव में महाशिवरात्रि के अवसर पर आयोजित मेले की खुशियां उस समय अफरा-तफरी में बदल गईं, जब गोलगप्पा खाने के बाद दर्जनों बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। घटना द्वारिका शिव मंदिर के पास लगे मेले की बताई जा रही है, जहां फूड पॉइजनिंग की आशंका जताई जा रही है। कई बच्चों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
मजदूर परिवारों के बच्चों पर सबसे ज्यादा असर
पीड़ित बच्चों में बड़ी संख्या ईंट-भट्ठा मजदूरों के परिवारों की है, जो रोजी-रोटी के लिए इलाके में रह रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण परिजन निजी अस्पताल में इलाज कराने में असमर्थ हैं। बदहवास माता-पिता बच्चों को गोद में लेकर स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की मदद का इंतजार करते रहे। खबर लिखे जाने तक मौके पर स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं पहुंची थी।
केमिकल या घटिया सामग्री के इस्तेमाल की आशंका
ग्रामीणों का आरोप है कि गोलगप्पा विक्रेता द्वारा इस्तेमाल किए गए पानी या मसालों में अखाद्य केमिकल या खराब सामग्री का उपयोग किया गया हो सकता है। गोलगप्पा खाने के कुछ ही देर बाद बच्चों को उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत शुरू हो गई।
ग्रामीणों के प्रमुख आरोप:
- मेले में खाद्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी
- इस्तेमाल किए गए मसालों की जांच की मांग
- प्रशासनिक लापरवाही से बच्चों की जान खतरे में
जनप्रतिनिधि ने उठाई कार्रवाई की मांग
घटना की जानकारी मिलने के बाद निरंजन यादव (प्रदेश उपाध्यक्ष, कांग्रेस ओबीसी) ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने प्रभावित गांव में मेडिकल कैंप लगाने, एंबुलेंस और डॉक्टरों की टीम भेजने तथा दोषी विक्रेता पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
“गरीब बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग को तुरंत सक्रिय होना चाहिए ताकि किसी भी अनहोनी को रोका जा सके।”
— निरंजन यादव
स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल
घटना के कई घंटे बाद भी मेडिकल टीम के नहीं पहुंचने से ग्रामीणों में आक्रोश है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते प्राथमिक उपचार और सलाइन नहीं चढ़ाया गया तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
“गरीब मजदूर अपने बच्चों का इलाज कराने में सक्षम नहीं हैं। प्रशासन को तुरंत कदम उठाना चाहिए।”
— स्थानीय ग्रामीण
जनता पर असर
इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। मेले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े हो गए हैं। अभिभावक बच्चों को बाहर का खाना खिलाने से डर रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में लगने वाले मेलों में अक्सर खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो पाता, जिससे फूड पॉइजनिंग जैसी घटनाएं सामने आती रहती हैं। विशेषज्ञ समय-समय पर साफ पानी और स्वच्छ सामग्री के उपयोग की सलाह देते रहे हैं।
आगे की स्थिति
अब नजर पलामू स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर है कि प्रभावित बच्चों के इलाज और जांच प्रक्रिया में कितनी तेजी दिखाई जाती है और दोषी विक्रेता के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।
महाशिवरात्रि जैसे आस्था के पर्व पर हुई इस घटना ने प्रशासन की तैयारियों और खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। समय पर इलाज और निष्पक्ष जांच ही प्रभावित परिवारों को राहत दे सकती है।
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