BRICS 2026: भारत ने की अध्यक्षता की औपचारिक शुरुआत, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने लोगो, थीम और वेबसाइट का किया अनावरण


भारत ने आज BRICS समूह की वर्ष 2026 की अध्यक्षता की औपचारिक शुरुआत कर दी। इस अवसर पर विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष समारोह में BRICS 2026 का आधिकारिक लोगो, थीम और वेबसाइट का अनावरण किया। यह कार्यक्रम मकर संक्रांति की पूर्व संध्या पर आयोजित हुआ, जो भारतीय परंपरा में नई शुरुआत, ऊर्जा और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
गौरतलब है कि BRICS की स्थापना के 20 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं और भारत चौथी बार इस प्रभावशाली वैश्विक समूह की अध्यक्षता कर रहा है। इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में BRICS की कमान संभाल चुका है।
🇮🇳 लोगो में भारत की सांस्कृतिक पहचान और वैश्विक दृष्टि
BRICS 2026 का नया लोगो भारत की सांस्कृतिक विरासत, लचीलापन और सहयोग की भावना को दर्शाता है।
लोगो के केंद्र में कमल का फूल है, जो भारत का राष्ट्रीय पुष्प है और आशा, स्थिरता व पुनर्जन्म का प्रतीक माना जाता है।
कमल के मध्य में बनी ‘नमस्ते’ की मुद्रा आपसी सम्मान, संवाद और सहयोग का संदेश देती है।
वहीं कमल की पंखुड़ियों में BRICS सदस्य देशों के रंगों का समावेश किया गया है, जो विविधता में एकता के सिद्धांत को दर्शाता है।
विशेष बात यह है कि इस लोगो को ओपन डिजाइन कॉन्टेस्ट के माध्यम से चुना गया, जिससे वैश्विक भागीदारी और रचनात्मकता को बढ़ावा मिला।
बदलती वैश्विक व्यवस्था पर जयशंकर का बड़ा बयान
लॉन्च कार्यक्रम के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक हालात, व्यापार युद्ध और भारत की रणनीति पर स्पष्ट और बेबाक राय रखी।
अमेरिकी टैरिफ और व्यापार युद्ध
अमेरिका में संभावित टैरिफ बढ़ोतरी और संरक्षणवादी नीतियों पर उन्होंने कहा:
- भारत ऐसे वैश्विक बदलावों से घबराने वाला नहीं है
- दुनिया में Protectionism बढ़ रहा है, लेकिन भारत अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देगा
- भारत अपनी विनिर्माण क्षमता (Manufacturing) को मजबूत कर बाहरी झटकों से निपटने के लिए तैयार है
BRICS में भारत की भूमिका
जयशंकर ने साफ किया कि:
- BRICS कोई पश्चिम-विरोधी मंच नहीं है
- यह गैर-पश्चिमी (Non-Western) देशों का सहयोगी समूह है
- इसका उद्देश्य Global South की आवाज को मजबूत करना और वैश्विक आर्थिक संतुलन बनाना है
भारत BRICS को अपनी बहुपक्षीय कूटनीति और आर्थिक रणनीति के अहम मंच के रूप में देखता है।
आत्मनिर्भर भारत और ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत अब केवल एक उपभोक्ता बाजार नहीं रहना चाहता:
- भारत का लक्ष्य ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनना है
- इसके लिए सप्लाई चेन की सुरक्षा और सही दिशा में विदेशी निवेश बेहद जरूरी है




