इंडिगो के मुनाफे में 77% की भारी गिरावट: क्या नए लेबर कोड और दिसंबर का संकट हैं असली विलेन!

भारतीय एविएशन सेक्टर की दिग्गज कंपनी इंडिगो (InterGlobe Aviation) के लिए वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) काफी उतार-चढ़ाव भरी रही। कंपनी ने अपने नतीजे घोषित किए हैं, जिसमें नेट प्रॉफिट में 77.5% की भारी गिरावट दर्ज की गई है। जहां पिछले साल इसी दौरान कंपनी ने ₹2,448.8 करोड़ का मुनाफा कमाया था, वहीं इस बार यह सिमटकर ₹549.8 करोड़ रह गया है।
आखिर क्यों इंडिगो जैसी मजबूत कंपनी के मुनाफे में इतनी बड़ी सेंध लगी? आइए समझते हैं इसके पीछे की पूरी कहानी।
मुनाफे में गिरावट के 2 बड़े कारण
इंडिगो के मुनाफे को कम करने में दो प्रमुख “Exceptional Items” (एक बार के खर्च) ने बड़ी भूमिका निभाई, जिनका कुल मूल्य करीब ₹1,546.5 करोड़ है।
1. नए लेबर कोड्स का वित्तीय बोझ (₹969.3 करोड़)
नवंबर 2025 से भारत में नए लेबर कोड (जैसे Code on Wages, 2019) लागू हुए। इसके तहत अब कंपनियों के लिए बेसिक सैलरी को कुल CTC का कम से कम 50% रखना अनिवार्य हो गया है।
- असर: इस बदलाव के कारण इंडिगो को प्रोविडेंट फंड (PF) और ग्रेच्युटी जैसे स्टेट्यूटरी पेमेंट्स के लिए भारी प्रावधान करना पड़ा। कंपनी को इस मद में ₹969.3 करोड़ का एकमुश्त खर्च उठाना पड़ा, जिससे सीधे तौर पर नेट प्रॉफिट कम हो गया।
2. दिसंबर का ‘ऑपरेशनल संकट’ (₹577.2 करोड़ का नुकसान)
दिसंबर 2025 का महीना इंडिगो के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं था। नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों के कारण पायलटों की भारी कमी हो गई।
- परिणाम: पीक वेडिंग और हॉलिडे सीजन में लगभग 4,500 फ्लाइट्स प्रभावित हुईं (2,507 कैंसल और 1,852 डिले)।
- खर्च: 3 लाख से ज्यादा यात्रियों को रिफंड और मुआवजा देने में कंपनी को ₹577.2 करोड़ का चपत लगी। साथ ही, DGCA ने लापरवाही के लिए ₹22 करोड़ का जुर्माना भी लगाया।
बिजनेस रिपोर्ट कार्ड: रेवेन्यू में बढ़त, लेकिन खर्चों का दबाव
भारी गिरावट के बावजूद, कंपनी के कुछ आंकड़े राहत देने वाले भी हैं:
- रेवेन्यू: सालाना आधार पर 6% बढ़कर ₹23,472 करोड़ हो गया।
- यात्रियों की संख्या: इंडिगो ने इस तिमाही 31.9 मिलियन यात्रियों को सफर कराया (2.8% की बढ़त)।
- यील्ड (Yield): प्रति किलोमीटर कमाई 1.8% गिरकर ₹5.33 रह गई।
- लोड फैक्टर: विमानों की ऑक्यूपेंसी थोड़ी गिरकर 84.6% रही।
CEO का संदेश: “हम माफी चाहते हैं”
इंडिगो के CEO पीटर एल्बर्स ने दिसंबर में यात्रियों को हुई असुविधा के लिए खुले तौर पर माफी मांगी है। उन्होंने भरोसा जताया कि अब ऑपरेशंस सामान्य हो रहे हैं। कंपनी का लक्ष्य चौथी तिमाही (Q4) में 10% की ग्रोथ हासिल करना है और इसके लिए बड़े पैमाने पर पायलटों की भर्ती की जा रही है।
निवेशकों के लिए क्या है इसके मायने?
बाजार को उम्मीद थी कि मुनाफा 18-46% गिरेगा, लेकिन 77% की गिरावट ने सबको चौंका दिया। चिंता की बात: शॉर्ट-टर्म में रेगुलेटरी दबाव और ऑपरेशनल रिस्क। राहत की बात: इंडिगो की लिक्विडिटी (नकद स्थिति) ₹51,606 करोड़ के साथ बहुत मजबूत है। साथ ही, 60-65% मार्केट शेयर और 440+ नए विमानों का ऑर्डर कंपनी की लंबी रेस का घोड़ा होने की पुष्टि करता है।
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