
रांची। ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) के अधिकारियों के खिलाफ रांची के एयरपोर्ट थाने में दर्ज एफआईआर और रांची पुलिस की कार्रवाई के विरोध में ईडी झारखंड हाईकोर्ट पहुंच गई है। इस मामले पर शुक्रवार को हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। ईडी ने पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। ईडी का कहना है कि उसके दफ्तर में पुलिस की जांच और एयरपोर्ट थाने में ईडी अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाना गलत है। एजेंसी का आरोप है कि यह सब पेयजल विभाग में हुए कथित घोटाले के आरोपियों को बचाने के लिए किया जा रहा है। ईडी ने अपनी याचिका में कहा है कि उसके अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर एक साजिश का हिस्सा है, जिसका मकसद केंद्रीय एजेंसी की जांच को कमजोर करना है। इसी कारण ईडी ने हाईकोर्ट से एफआईआर रद्द करने और पुलिस जांच पर रोक लगाने की मांग की है।
मामला पेयजल विभाग में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले का है
यह पूरा मामला पेयजल विभाग में हुए करीब 23 करोड़ रुपये के घोटाले से जुड़ा है। इस घोटाले के आरोपी और तत्कालीन क्लर्क संतोष कुमार ने ईडी के दो अधिकारियों के खिलाफ एयरपोर्ट थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। संतोष कुमार ने आरोप लगाया है कि 12 जनवरी को ईडी दफ्तर में उसके साथ मारपीट की गई और उसे जबरन रोका गया। इस मामले में रांची के एयरपोर्ट थाने में कांड संख्या 05/2026 के तहत बीएनएस की कई धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है।
जांच के लिए इतनी बड़ी टीम क्यों लाई गई
ईडी अधिकारियों के अनुसार, 12 जनवरी को एफआईआर दर्ज होने के बाद 14 जनवरी की रात करीब 11:30 बजे रांची पुलिस ने ईडी को ई-मेल भेजकर बताया कि 15 जनवरी की सुबह पुलिस टीम जांच और बयान दर्ज करने के लिए ईडी कार्यालय आएगी। इसके बाद 15 जनवरी की सुबह करीब 7 बजे 15 से 20 पुलिसकर्मी ईडी दफ्तर पहुंचे और जांच शुरू की। पुलिस टीम पूरे दिन, सुबह से शाम करीब 4 बजे तक, ईडी कार्यालय में अलग-अलग जगहों की जांच करती रही। ईडी अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने पुलिस से सवाल किया कि एक छोटे मामले की जांच के लिए इतनी बड़ी टीम क्यों लाई गई, जबकि यह काम दो-तीन अधिकारी भी कर सकते थे। उन्होंने यह भी कहा कि एजेंसी जांच में पूरा सहयोग करेगी, लेकिन पुलिस अधिकारियों ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया।
बड़े अधिकारियों और कुछ नेताओं के नाम बताए थे
ईडी का दावा है कि संतोष कुमार पहले भी पेयजल घोटाले के मामले में पूछताछ का सामना कर चुका है और उसने पूछताछ के दौरान कई बड़े अधिकारियों और कुछ नेताओं के नाम बताए थे। ईडी के अनुसार, 12 जनवरी को संतोष को कोई समन नहीं दिया गया था, बल्कि वह खुद ईडी कार्यालय पहुंचा था। एजेंसी का कहना है कि उसी दौरान संतोष ने कांच के जग से अपने सिर पर खुद वार कर लिया था। घायल होने के बाद ईडी अधिकारियों ने ही उसका इलाज करवाया। ईडी का यह भी कहना है कि उस समय संतोष का बयान दर्ज किया गया था, जिसमें उसने माना था कि वह खुद एजेंसी के दफ्तर आया था। एजेंसी का आरोप है कि संतोष एक सोची-समझी साजिश के तहत ईडी अधिकारियों को फंसाने आया था। मेडिकल जांच में भी उसके शरीर पर गंभीर चोट के निशान नहीं पाए गए हैं।
जानकारी पुलिस मुख्यालय को दी गई थी
ईडी अधिकारियों ने बताया कि पूरे मामले की जानकारी पुलिस मुख्यालय और रांची के एसएसपी को दी गई थी। इसके अलावा एयरपोर्ट थाने में इस संबंध में एक सनहा भी एजेंसी की ओर से दिया गया था, लेकिन उस समय पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। ईडी का आरोप है कि बिना मेडिकल रिपोर्ट के ही उसके अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई। एजेंसी का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई पेयजल घोटाले की जांच को प्रभावित करने के लिए की गई है। ईडी के अनुसार, संतोष कुमार ने पहले दिए गए अपने बयान में कई अधिकारियों और कुछ राजनेताओं का नाम लिया था। इसी मामले में पूछताछ के लिए संतोष की पत्नी को भी समन जारी किया गया था।





