1 जनवरी 2026 को रिलीज हुई श्रीराम राघवन निर्देशित फिल्म ‘इक्कीस’ दर्शकों और समीक्षकों के बीच खास चर्चा में है। परमवीर चक्र विजेता सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल के जीवन पर आधारित यह फिल्म पारंपरिक युद्ध फिल्मों से अलग एक संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण पेश करती है।
फिल्म रिव्यू (रेटिंग: ⭐⭐⭐½ / 5)
‘इक्कीस’ शोर-शराबे वाली देशभक्ति के बजाय सैनिकों की भावनाओं, मानसिक दबाव और बलिदान की कीमत को गहराई से दिखाती है। फिल्म की यही सादगी इसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरती है।
अभिनय की मजबूती
- धर्मेंद्र
यह दिग्गज अभिनेता की मरणोपरांत रिलीज हुई अंतिम फिल्म है। अरुण खेत्रपाल के पिता की भूमिका में धर्मेंद्र को समीक्षकों ने फिल्म की “आत्मा” बताया है। उनका अभिनय दर्शकों को भावुक कर देता है। - अगस्त्य नंदा
अपनी पहली थिएटर रिलीज में अगस्त्य नंदा ने गंभीर, संतुलित और प्रभावशाली अभिनय से सबका ध्यान खींचा है। कई समीक्षकों ने उनके अभिनय की तुलना अभिषेक बच्चन के शुरुआती दौर की सादगी से की है। - जयदीप अहलावत
पाकिस्तानी ब्रिगेडियर के किरदार में जयदीप अहलावत एक बार फिर अपनी अभिनय क्षमता साबित करते हैं। धर्मेंद्र के साथ उनके दृश्य फिल्म के सबसे दमदार पलों में गिने जा रहे हैं।
निर्देशन और तकनीकी पक्ष
‘अंधाधुन’ जैसी फिल्मों के लिए पहचाने जाने वाले श्रीराम राघवन ने युद्ध को केवल गोलियों और धमाकों तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने 1971 के युद्ध के टैंक ऑपरेशन को यथार्थवादी ढंग से फिल्माते हुए सैनिकों के भीतर चल रहे संघर्ष को प्रमुखता दी है।
पहले दिन का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन
नए साल की छुट्टी और मजबूत वर्ड ऑफ माउथ का असर बॉक्स ऑफिस पर भी दिखा।
- पहले दिन का अनुमानित नेट कलेक्शन: ₹6.6 करोड़
- मुकाबला: रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर’ के दबदबे के बावजूद ‘इक्कीस’ ने संतोषजनक शुरुआत की है
- उम्मीद: वीकेंड पर कमाई में अच्छी बढ़ोतरी की संभावना
चर्चित पल
- फिल्म की स्क्रीनिंग के बाद सनी देओल और अमिताभ बच्चन ने सोशल मीडिया पर भावुक प्रतिक्रियाएं साझा कीं
- अमिताभ बच्चन ने अपने नाती अगस्त्य नंदा के अभिनय की खुलकर सराहना की
निष्कर्ष
‘इक्कीस’ सिर्फ एक युद्ध फिल्म नहीं, बल्कि कर्तव्य, बलिदान और सम्मान की ऐसी कहानी है जो शांति से दिल में उतरती है। मजबूत अभिनय, संवेदनशील निर्देशन और ऐतिहासिक ईमानदारी इसे यादगार बनाती है।



